Gareeb Mahilayen Udhar Evam Rozgaar

Indira Mishra

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-471-5

भारत में गरीबी की समस्या प्रबल है और गरीबी की मार महिलाओं पर अधिक सीधी और तीखी होती है, क्योंकि महिलाएं परिवार के भरण-पोषण के लिए जिम्मेदार ठहराई जाती हैं। वे मातृत्व का भार वहन करते हुए शरीर से दुर्बल होती हैं, यद्यपि उनमें भावनात्मक इच्छाशक्ति प्रचुर मात्रा में होती है। गरीबी को दूर करने के लिए केंद्रीय तथा प्रदेश सरकारें, स्वायत्त संस्थाएं तथा अन्य कई प्रकार की एजेंसियां कटिबद्ध हैं, किंतु यह समस्या अभी तक कारगर ढंग से सुलझाई नहीं जा सकी। गरीब तथा ग्रामीण महिलाएं अक्सर अचल संपत्ति-विहीन और शिक्षा के लाभ से वंचित होती हैं। फिर भी उनके अंदर रचनात्मकता तो होती ही है तथा अपनी मदद स्वयं करने के लिए भी वे सतत उत्सुक होती हैं।
ऐसी महिलाओं की, जो स्वयं की छोटी सी दूकान खोलना या कोई अन्य छोटा-मोटा रोजगार करना चाहती हैं, कर्जे की आवश्यकता बहुत ज्यादा नहीं होती। दूसरी आजमाई हुई बात यह है कि महिला उतना ही ऋण लेना पसंद करती है जितने को किस्तों में लौटा भी सके। किंतु इस सबके बावजूद कोई भी वित्तीय संस्था एकाएक उसे कोई ऋण देने की स्थिति में नहीं होती।
प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे विषय सामान्य नागरिकों, स्वैच्छिक संस्थाओं तथा बैंककर्मियों आदि के समक्ष स्पष्ट किए गए हैं।

Indira Mishra

डॉ. इंदिरा मिश्र 
जन्म: 7 सितंबर, 1945
शिक्षा: बचपन में कनखल, उत्तराखंड में, श्री अरविंद आश्रम पांडिचेरी में तथा दिल्ली में (एम.ए. अंग्रेजी)।
शासकीय सेवा के दौरान: यॉर्क यूनिवर्सिटी, यू.के. (एम.ए. राजनीति), बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल (पी-एच.डी.) तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (एल-एल.बी.)।
शासकीय सेवा: 1966 से 1968 दिल्ली के एक महाविद्यालय में व्याख्याता, 1968 में भारतीय राजस्व सेवा (आई.आर.एस.)।
1969 से 2005 तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई.ए.एस.) में मध्य प्रदेश में 20 वर्ष, भारत सरकार में (10 वर्ष) तथा छत्तीसगढ़ सरकार में (5 वर्ष), 
वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त।
निजी क्षेत्र में सेवा: वर्ष 2005 से 2006 तक रायपुर के राय (निजी) विश्वविद्यालय में कुलपति (मनोनीत)
वर्तमान: समाज सेवा, संपादक: नवांकुर ;आध्यात्मिक विचारों तथा सकारात्मक सोच की मासिक पत्रिकाद्ध, स्वतंत्र लेखन, रायपुर के ‘देशबंधु’ दैनिक समाचार-पत्र में नियमित कॉलम लेखन, राज्य शासन को विभिन्न कार्यक्रमों में सहयोग।
प्रकाशित पुस्तकें: अब तक 11 (कविता, विविध विषयों पर ललित निबंध, वैचारिक निबंध तथा अनुवाद एवं 4 पुस्तकें विकासमूलक)

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