Man Manthan Ki Gaatha

Amrita Pritam

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170161684

इन तकरीरों में से-

कलम का कर्म अनेकरूप होता है---
वह बचकाना शौक में से निकले---
तो जोहड़ का पानी हो जाता है.... 
सिर्फ पैसे की कामना में से निकले---
तो नकली माल हो जाता है... 
सिर्फ शोहरत की लालसा में से निकले---
तो कला का कलंक हो जाता है... 
अगर बीमार मन में से निकले---
तो जहरीली आबोहवा हो जाता है... 
अगर किसी सरकार की खुशामद में से निकले-
तो जाली सिंक्का हो जाता है…

जो कुछ गलत है, वह सिर्फ एक लफ्ज में गलत है
फिरकापरस्ती लफ्ज में ।
उस गलत को उठाकर हम कभी इसे
हिन्दू लफ्ज के कंधों पर रख देते हैं
कभी सिक्ख लफ्ज के कंधों पर
और कभी मुसलमान लफ्ज के कंधों पर
इस तरह कंधे बदलने से कुछ नहीं होगा---

धर्म तो मन की अवस्था का नाम है
उसकी जगह मन में होती है, मस्तक में होती है,
और घर के आँगन में होती है
लेकिन हम उसे मन-मस्तक से निकालकर
और घर के आँगन से उठाकर---
बाजार में ले आये हैं... 

सुर्ख खून सड़कों पर बहता हुआ भी
उतना ही भयानक होता है,
जितना फिरकापरस्ती के ज़हर से काला खून
किसी की रगों में चलता हुआ

काया का जन्म माँ की कोख से होता है
दिल का जन्म अहसास की कोख से होता है
मस्तक का जन्म इल्म की कोख से होता है
और जिस तहजीब की शाखाओं पर-
अमन का बौर पड़ता है,
उस तहजीब का जन्म अन्तर्चेतना की कोख से होता है ।

बात तो अपनी इसी धरती की होती है,
लेकिन जब तक उसे एक टुकडा पाताल
और एक टुकड़ा आसमान न मिले,
बात बनती नहीं,
और अमृता अपनी बात में

एक टुकडा पाताल और एक टुकडा आसमान
मिलाना जानती है ।
इसीलिए अमृता की तकरीरें
वक्त का एक दस्तावेज है ।

Amrita Pritam

अमृता प्रीतम
(वास्तविक नाम-अमृत कौर)
जन्मतिथि : 31 अगस्त, 1919
जन्मस्थान : गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में)
प्रकाशित कृतियाँ : उनके हस्ताक्षर, ना राधा ना रुक्मणी, कम्मी और नंदा, रतना और चेतना (उपन्यास); दस प्रतिनिधि कहानियां, अलिफ लैला : हजार दास्तान, कच्चे रेशम सी लड़की (कहानी-संग्रह); रसीदी टिकट (आत्मकथा); खामोशी से पहले (कविता-संग्रह) मेरे साक्षात्कार (सं० : अस्मा सलीम तथा श्याम सुशील), मन मंथन की गाथा (सं० : इमरोज) (साक्षात्कार/लकरीरें); एक थी सारा, काया के दामन में, शक्तिकणों की लीला, काल-चेतना, अज्ञात का निमंत्रण, सितारों के संकेत, सपनों की नीली सी लकीर, अनंत नाम जिज्ञासा (आध्यात्मिक सत्यकथाएँ); सितारों के अक्षर किरनों की भाषा, मन मिर्जा तन साहिबाँ, अक्षर कुण्डली, वर्जित बाग की गाथा (सं० : अमृता प्रीतम), बेवतना (सं० : अमृता प्रीतम) (चिंतन/संस्मरण/रेखाचित्र आदि)।
पुरस्कार-सम्मान : साहित्य अकादेमी पुरस्कार 'सुनेहड़े' (कविता-संग्रह : 1956), भारत के राष्ट्रपति द्वारा पदमश्री सम्मान (1969), भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार 'कागज ते कैनवस' (कविता-संग्रह :  1981) तथा पदमबिभूषण सम्मान (2004) के अलावा अन्य बहुत-से पुरस्कारों-सम्मानों से अलंकृत ।

स्मृति-शेष : 31 अक्तूबर, 2005

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