Nibandhkar Hazari Prasad Diwvedi

Usha Singhal

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  • Year: 1993

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 111-11-11111-11-1

निबंधकार हजारीप्रसाद द्विवेदी
शैली विज्ञान के संदर्भ में आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के निबन्ध-साहित्य पर अभी तक कोई निरुपाधि या सोपाधि शोधकार्य संभवत: नहीं हुआ है । अत: शैली विज्ञान की दृष्टि से आचार्य द्विवेदी के निबंधों के सम्यक विश्लेषण का यह पहला प्रयास है ।
शैलीवैज्ञानिक अध्ययन के क्षेत्र में किसी कृति के सम्यक विश्लेषण के लिए, आज नानाविध प्रतिमान प्रचलित हैं, जिनमें 'चयन-प्रतिमान' को सभी प्रतिमानों का मूलाधार माना जाता है । प्रस्तुत अध्ययन इसी प्रतिमान को आधार बनाकर किया गया है ।
आचार्य द्विवेदी ने अपने निबन्धों में किस प्रकार ध्वनि, शब्द, वाक्य, तथा विभिन्न व्याकरणिक कोटियों के सार्थक चयन से कथ्य का चयन किया है, इस पर भी विदुषी आलोचिका डा० उषा सिंहल ने अपनी विश्लेषणपरक दृष्टि केंद्रिय रखी है ।
यह अध्ययन विद्वत् समाज के लिए आचार्य द्विवेदी के साहित्य के अध्ययन की नई दिशाएँ प्रशस्त करेगा ।

Usha Singhal

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