Saundarya-Meemansa

V.K. Gokak

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-89982-25-6

"सौंदर्य-मीमांसा" कन्नड़ के प्रतिष्ठित लेखक डॉ० वी० के० गोकाक की कन्नड़ कृति 'काव्य-मीमांसे' का हिंदी अनुवाद है । हिंदी में सौंदर्यशास्त्र पर यह अपने ढंग की पुस्तक होगी ओर निश्चय ही मोंदृवंशद्रस्व के अध्येताओं को इस पुस्तक से काफी सहायता मिलेगी । गोकाक ने विशेष भाषण-माला के अन्तर्गत सौंदर्यशास्त्र पर भाषण दिए थे । 'कला-स्वरूप', 'ध्वनि तथा प्रतिध्वनि', 'रस या जीवन-दृष्टि'–इन लेखों में लेखक ने भारतीय तथा पाश्चात्य आलोचना त्तत्वों के आधार पर विचार करके अपने मौलिक सिद्धांतों का प्रतिपादन किया है । डॉ. गोकाक स्वयं कन्नड़ और अंग्रेजी के कवि, उपन्यासकार और श्रेष्ठ आलोचक हैं। गोकाक के पास जीवन का व्यापक अनुभव और अंग्रेजी साहित्य का अपार पांडित्य है । दार्शनिक मनोवृति से वस्तु को तटस्थ दृष्टि से देखकर उसके सत्य को परखने की जिज्ञासा उनमें है । इन लेखों में उन्होंने साहित्या, कला, धर्म के  तत्यों के आराधक होकर सौंदर्य के तत्तवों का साक्षात्कार किया है। नि:संदेह यह कृति भारतीय काव्यशास्त्र को लेखक की अमूल्य देन है। इस अनुवाद में यदि त्रुटियाँ मिल जाएँ तो समझिए यह मेरी कमजोरी है ।
डॉ. टी. आर० भट्ट

V.K. Gokak


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