Dus Pratinidhi Kahaniyan : Gian Ranjan

Gyanranjan

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170163732

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार ज्ञानरंजन ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'शेष होते हुए', 'पिता', 'फैंस के इधर और उधर', 'छलाँग', 'यात्रा', 'संबंध', 'घंटा', 'बहिर्गमन', 'अमरूद का पेड़' तथा 'अनुभव' ।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक ज्ञानरंजन की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Gyanranjan

ज्ञानरंजन 

जन्म : 21 नवंबर, 1936
प्रारंभिक जीवन निरंतर प्रवास में बीता-महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश में ।
पिता श्री रामनाथ सुमन प्रख्यात गांधीवादी विचारक, लेखक और पत्रकार, छायावाद काल के प्रमुख आलोचकों में थे । उनकी यायावरी का गहरा असर । शिक्षा : एम०ए० इलाहाबाद विश्वविद्यालय से । जीविका : जबलपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर ० पैतीस वर्षों तक हिंदी की साहित्यिक पत्रिका 'पहल' के संपादक
सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड, उ०प्र० हिंदी संस्थान के साहित्य ० भूषण पुरस्कार, म०प्र० साहित्य परिषद के सुभद्राकुमारी ० चौहान पुरस्कार, शिखर सम्मान (भोपाल), प्रतिभा सम्मान (कोलकाता) और अनिल कुमार सम्मान से विभूषित ।
देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों से कहानियां पाठ्यक्रम में / साहित्य अकादेमी, नेशनल वुक ट्रस्ट और एन०सी०ई० आर०टी० द्वारा पाठ्यक्रम और एंथालॉजी में संगृहीत / अंग्रेजी, पोल, रूसी, जर्मन और डच भाषाओं में कलियों के अनुवाद / अब तक  5 कहानी-संग्रह प्रकाशित ।

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