Dus Pratinidhi Kahaniyan : Khushwant Singh

Khushwant Singh

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170163763

किताबघर प्रकाशन की महत्वाकांक्षी कथा-सीरीज़ 'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' को विस्तार देते हुए इसे अब अखिल भारतीय स्वरूप प्रदान किया गया है । अर्थात् इस सीरीज़ में अब सभी भारतीय भाषाओँ के शीर्ष कथाकारों की प्रतिनिधि कहानियां उपलब्ध कराये जाने की योजना है ।
सीरीज़ के इस नव्यतम सेट में शामिल कथाकार हैं : अमरकान्त, कृष्ण बलदेव वैद, खुशवंत सिंह, गोविन्द मिश्र, ज्ञानरंजन, देवेन्द्र सत्यार्थी, निर्मल वर्मा, प्रतिभा राय, शनी, शेखर जोशी तथा शैलेश मटियानी । विभिन्न भाषाओँ के इन भारतीय कथाकारों ने अपनी सर्जनात्मकता के बल पर स्वयं को आधुनिक कथा के जिस शीर्षस्थ स्थान पर स्थापित किया है वह अपने आप में एक उपलब्धि है । इसी 'उपलब्धि' को एक सीरीज़ के माध्यम से पाठक तक पहुँचाकर हम गौरवान्वित है ।
यह सुखद संयोग है कि आजादी के पावन स्वर्ण जयंती  के शुभ अवसर पर देश का विशाल पाठक वर्ग इन कथाओं के माध्यम से मनुष्य और परिवेश के नितांत नये रूपों और अप्रकाशित छवियों को पा सकेगा । इन कहानियों में आदमी के मनुष्य हो जाने की अनुभूतियों के जिस तरलता और सरलता से पिरोया गया है, वह सचमुच एक अदभुत पाठकानुभव है । 
कहानीकार के कथाकर्म का प्रतिनिधि एवं केंद्रीय स्वर, गहन आत्मीयता से यहाँ सामने लाया गया है । यह कथाकार की अपनी कथाभूमि तो है ही, लगता है, हम सबकी सगी दुनिया भी यही है । टूटती-ढहती और फिर से बनती-सँवरती दुनिया । मानवताकामी शुभेच्छा की यह आकांक्षा ही इस सीरीज़ की वह शक्ति है जो आज के तमाम चालू कथा- सीरीज़ों से इसे अलग खड़ा करती है ।
तो, प्रस्तुत है खुशवंत सिंह की दस प्रतिनिधि कहानियाँ  ।

Khushwant Singh

खुशवंत सिंह
15 अगस्त, 1915 हडाली (अब पाकिस्तान में) में जन्म ।  लाहौर से स्नातक तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से एल-एल० बी० ।
1939 से 1947 तक लाहौर हाईकोर्ट में वकालत । विभाजन के बाद भारत की 'राजनयिक सेवा' के अंतर्गत कनाडा में 'इन्फॉर्मेशन अफसर' तथा इंग्लैंड में भारतीय उच्चायुक्त के 'प्रेस अटैची' के पद पर कार्य । कुछ वर्षों तक प्रिंस्टन तथा स्वार्थमोर विश्वविद्यालयों में अध्यापन ।
भारत लौटकर नौ वर्षों तक 'इलस्ट्रेटेड वीकली तथा तीन वर्षों त्तक 'हिन्दुस्तान टाइम्स' का संपादन । 1980 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत ।  1974 में प्राप्त पद्मभूषण की उपाधि वा 'ऑपरेशन ब्लू स्टार ' के विरोधस्वरूप त्याग । 'हिन्दुस्तान टाइम्स', 'वीक' और 'संडे आब्जर्वर' के लिए नियमित स्तंभ लिखे  तथा 'पेंगुइन बुक्स कंपनी इंडिया' के सलाहकार संपादक के रूप में भी कार्य किया।
पैतीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित । प्रमुख हैं : ट्रेन टु पाकिस्तान ० हिस्ट्री  ऑफ सिख्स (दो खंड) ० रंजीत सिंह ०  दिल्ली ० मेरे मित्र : कुरु महिलाएँ कुछ पुरुष ० नेचर वॉच तथा कालीघाट टु कैलकटा । चार कहानी-संग्रहों तथा अनेक लेखमालाओं के अतिरिक्त उर्दू और पंजाबी से कई अनुवाद भी ।
स्मृति-शेष : 20 मार्च, 2014

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