Dus Pratinidhi Kahaniyan : Nirmal Verma

Nirmal Verma

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170163749

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार निर्मल वर्मा ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'दहलीज', 'लवर्स', 'जलती झाड़ी', 'लंदन की एक रात', 'उनके कमरे'', 'डेढ़ इंच ऊपर', 'पिता और प्रेम', 'वीकएंड', जिंदगी यहाँ और वहाँ' तथा 'आदमी और लड़की' ।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक निर्मल वर्मा की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Nirmal Verma


निर्मल वर्मा

जन्म : 1929 ।
जन्म-स्थान : शिमला ।
शिक्षा : सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली से इतिहास में एम०ए० । कुछ वर्ष अध्यापन ।

1959 से प्राग, चेकोस्लोवाकिया के प्राच्यविद्या संस्थान और चेकोस्लोवाकिया लेखक संघ द्वारा आमंत्रित । सात वर्ष चेकोस्लोवाकिया से रहे और कई  चेक कथाकृतियों के अनुवाद किए । कुछ वर्ष लंदन में यूरोप-प्रवास के दौरान टाइम्स ऑफ़  इंडिया के लिए वहाँ की सांस्कृतिक-राजनीतिक समस्याओं पर लेख और रिपोर्ताज लिखे । 1972 में वापसी। इंडियन  इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवान्स्ड स्टडीज़ (शिमला) में फेलो रहे और मिथक-चेतना पर कार्य किया । 1977 से इंटरनेशनल राइटिंग प्रोग्राम, आयोवा (अमेरिका) में हिस्सेदारी।  'मायादर्पण' कहानी पर फ़िल्म बनी, जिसे 1973 का सर्वश्रेष्ट हिंदी फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ । निराला सृजनपीठ, भोपाल (1981-83) और यशपाल सृजनपीठ, शिमला (1989) के अध्यक्ष। 1987 से इंग्लैंड के प्रकाशक रीडर्स इंटरनेशनल द्वारा निर्मल वर्मा की कहानियों का संग्रह "द वर्ड एल्सव्हेयर' प्रकाशित । उसी अवसर पर उनके व्यक्तित्व पर बी०बी०सी० चैनल 4 पर एक फिल्म प्रसारित व इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉनटैम्परेरी आर्ट्स (आई०सी०ए०) द्वारा अपने वीडियो संग्रहालय के लिए उनका एक लंबा इंटरव्यू रिकॉर्डिंग । 'कव्वे और काला पानी' पुस्तक साहित्य अकादेमी पुरस्कार (1985) से सम्मानित । संपूर्ण कृतित्व के लिए 1993 का साधना सम्मान । उ०प्र० हिंदी संस्थान का सर्वोच्च राममनोहर लोहिया अतिविशिष्ट सम्मान (1995) । भारतीय ज्ञानपीठ का मूर्तिदेवी पुरस्कार (1997)। 
प्रकाशित पुस्तकें : वे दिन ० लाल टीन की छत ० एक चिथड़ा सुख ० रात का रिपोर्टर (उपन्यास); परिंदे ० जलती झाड़ी ० पिछली गर्मियों में ० कव्वे और काला पानी ० प्रतिनिधि कहानियां ० मेरी प्रिय कहानियाँ ० बीच बहस में ० सूखा तथा अन्य कहानियां (कहानी-संग्रह); चीडों पर चाँदनी ० हर बारिश में (यात्रा-संस्मरण); शब्द और स्मृति ० कला का जोखिम ० ढलान से उतरते हुए ० भारत और यूरोप : प्रतिश्रुति के क्षेत्र ० शताब्दी के ढलते वर्षों में (निबंध); तीन एकांत (नाटक); दूसरी दुनिया (संचयन)।  अंग्रेजी में अनूदित : डेज़ ऑफ़ लॉगिंग ० डार्क डिस्पैचेज़ ० ए रैग  हैप्पीनेस (उपन्यास); हिल स्टेशन ० क्रोज़ ऑफ़ डिलीवरेंस ० ट वर्ल्ड एल्सव्हेयर ० सच ए विग इयरनिंग (कहानियाँ); वर्ल्ड एंड मेरी (निबंध); हिंदी से अनूदित : कुप्रीन की कहानियां ।

स्मृति-शेष : 25 अक्तूबर, 2005

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