Mere Saakshatkaar : Ashok Vajpeyi

Ashok Vajpayee

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  • Year: 1998

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170164173

मेरे साक्षात्कार : अशोक वाजपेयी
देश के सर्वाधिक विवादास्पद संस्कृतिकर्मी, कवि और आलोचक अशोक वाजपेयी गत तीन दशकों से हिन्दी साहित्य और संस्कृति के परिदृश्य पर छाए हुए हैं। कविता और आलोचना के साथ-साथ समय साहित्य और कलाओं के प्रति बहुलतावाद के पक्षधर श्री वाजपेयी पर अब तक जितने वैचारिक हमले हुए हैं, वे यह सिद्ध करने के लिए काफी है कि उनको भूलकर स्वातंत्र्योत्तर साहित्य की बहस अधुरी रहेगी ।
'मेरे साक्षात्कार' श्रृंखला की यह पुस्तक उन तमाम आरोपों और बहसों का एक दस्तावेज है जो गत तीस वर्षों में होती रहीं है । इनमें अशोक वाजपेयी ने बहुत सफाई से अपने पर लगाए जाते रहे आरोपों का खंडन किया है और साहित्य की सार्थक भूमिका को रेखांक्ति किया है । बातचीत में शामिल मुद्दे वहीं है जो वर्षो से साहित्यिक परिदृश्य पर उठते रहे है । इन मुद्दों में कला और साहित्य की स्वायत्तता तथा उसकी प्रजातांत्रिकता, कलादृष्टियों की लोकतांत्रिकता का सम्मान, साहित्य की समाज-सापेक्षता, कलावाद की जरूरत, कविता और विचार का द्वंद्व , उत्तर-आधुनिकता की उपादेयता और जीवन में साहित्य के सरोकार जैसे मुद्दे इस पुस्तक में बसी मुस्तैदी से उठाये गए है जिनका सटीक, सार्थक और दोटूक ज़वाब देते हुए अशोक वाजपेयी ने अपनी संघर्ष-यात्रा की सार्थकता प्रमाणित की है । पशिचमी अवधारणओं पर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने वाले कथित आलोचकों को भी वे करारा झटका देते है जब कहते है कि 'उत्तर- आधुनिकता भरत में प्राक आधुनिकता है ।'
अशोक बाजपेयी हिन्दी ही नहीं देश के दो-तीन ऐसे आलोचकों- भावकों में हैं जिनके लिए कलाओं का भी उतना ही मूल्य है जितना कि साहित्य का । पुस्तक में कई स्थलों पर संगीत, नृत्य, रूपंकर आदि कलाओँ पर बात करते हुए श्री वाजपेयी ने कलाओं की पारस्परिक्ता और मित्रता के कई ऐसे सूत्रों का भी खुलासा किया है जिनकी चर्चा हाल में अधिक मुखर हुई है । कहना चाहिए कि यह पुस्तक अपनी बेबाकी और उपादेयता के कारण उन सबको पसंद आएगी जो साहित्य को महज़ हथियार नहीं, संख्या भी मानते हैं ।

Ashok Vajpayee

अशोक वाजपेयी
जन्म: 16 जनवरी, 1941
भाषा-दक्षता: अंग्रेजी एवं हिंदी, संस्कृत एवं उर्दू की भी जानकारी
प्रकाशन: हिंदी में कविता एवं आलोचना की 38 पुस्तकें। बांग्ला, मराठी, गुजराती, राजस्थानी, उर्दू, अंग्रेजी एवं पोलिश में 8 पुस्तकें अनूदित
हिंदी एवं अंग्रेजी में 8 पत्रिकाएँ संपादित-समवेत, पहचान, पूर्वग्रह, समास, बहुवचन (सभी हिंदी), बहुवचन, कविता एशिया एवं हिंदी (सभी अंग्रेशी)
महत्त्वपूर्ण समाचार-पत्रों-टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, पायनियर, द हिंदू, द वीक, नई दुनिया, जनसत्ता, नवभारत टाइम्स आदि में रचनात्मक योगदान
अंग्रेशी, फ्रेंच, जर्मन, रूसी, स्पानी, हंगारी, नार्वेजियन, अरबी, पोलिश, बांग्ला, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, असमिया व स्वीडी इत्यादि में कविताएँ व लेख अनूदित एवं प्रकाशित।
पुरस्कार: कविता के लिए दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान (1994); कविता-संग्रह 'कहीं नहीं वहीं' के लिए साहित्य अकादेमी, राष्ट्रीय पुरस्कार (1994); अज्ञेय राष्ट्रीय सम्मान (1997); हिंदी साहित्य को योगदान के लिए; ऑफिस ऑफ द आर्डर ऑफ क्रास (2004), पोलैंड गणराज्य; ऑफिसर डे ल' ऑर्डर देस आर्ट्स एट देस लेटर्स (2005), फ़्रांस गणराज्य; कबीर सम्मान, (2006) मध्य प्रदेश शासन; डी.लिट् (मानद) (2011), केंद्रीय विश्वविद्यालय, हैदराबाद।

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