Aastha Ka Raasta

Dr. Arsu

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Suhani Books

  • ISBN No: 9789380927268

आस्था का रास्ता 
हर युग की समस्याएं और संवेदना, बदलती रहती हैं । इसका असर साहित्य पर पड़ना सहज स्वाभाविक है, लेकिन बाहरी तौर की विकास योजनाएं हमेशा हमें अंतर्दृष्टि नहीं देती हैं । अंतर्दृष्टि ही आस्था की नीव है । विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के युग में साहित्य में आए परिवर्तन के स्वरूप पर साहित्यकार के मन में आशंकाएं बढ़ रही हैं ।
आस्था का आलोक बुझ रहा है । बुद्धि-विकास के अनुपात में अनाज हृदय-विकास नहीं होता है । परंपरा, संस्कृति, साहित्य, धरोहर और विरासत का महत्त्व आज फीका पढ़ रहा है ।
इसके कारणों-परिणामों पर सोच-विचार करने वाले अट्ठारह लेखों का संकलन ।
मलयालमभाषी हिंदी लेखक और अनुवादक डॉ० आरसु की अद्यतन कृति । इसमें चिंतन का इंधन है । आस्था और आशंकाओं की धड़कन है ।

Dr. Arsu

डॉ० आरसु 
(कलमी नाम : आरसु)
जन्म : 1950, कालिकट 
मातृभाषा : मलयालम 
शिक्षा : हिंदी में एम० ए० पी-एच० डी० कालिकट विश्वविद्यालय से। पत्रकारिता और अनुवाद से डिप्लोमा ।
शेष विषय : स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास पर विदेशी संस्कृति और चिंतन का प्रभाव ।
अध्यापन : 1977 से 1984 तक गवर्नमेंट कॉलेज, कालिकट में 1985 से कालिकट विश्वविद्यालय में, 2008-2010 में आचार्य और अध्यक्ष, 2011 में सेवानिवृत्त ।
कृतियों : हिंदी और मलयालम में तीस कृतियाँ प्रकाशित ।
प्रमुख हिंदी कृतियाँ : 'स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास', ‘साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना', 'मलयालम साहित्य : परख और पहचान', 'अनुवाद : अनुभव और अवदान', 'हिंदी  साहित्य : सरोकार और साक्षात्कार', 'भारतीय भाषाओं के पुरस्कृत साहित्यकार', 'मलयालम के महान कथाकार', 'भारतीय साहित्य और आस्था' ।
पुरस्कार-प्रशस्तियां : ओइस्का इंटरनेशनल, जापान का पुरस्कार (1993), भारत सरकार का पुरस्कार (1997), बिहार सरकार का पुरस्कार (2003), उत्तर भारत की 10 साहित्यिक संस्थाओं के पुरस्कार, हरिवंश राय बच्वन पत्रकारिता पुरस्कार । सौहार्द सम्मान (उ० प्र०) (2009), केरल हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार (2010)।
अतिधि संपादक : अनुवाद मधुमति, सद्भावना दर्पण, अंतरंग, छत्तीसगढ़ टुडे, युगस्पंदन, वर्तमान जनगाथा, नवनिकप के मलयालम विशेषांकों के अतिधि संपादक ।
विशेष व्याख्यान : जापान के तीन विश्वविद्यालयों में भारतीय साहित्य पर व्याख्यान (2002), उत्तर भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अनुवाद, भारतीय साहित्य और साहित्यिक  पत्रकारिता पर व्याख्यान ।

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