Tabdeel Nigahein

Maitreyi Pushpa

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-82114-02-4

तबदील निगाहें
किसी भी व्यक्ति, विषय या कृति के संबंध में जो सिद्धांत, मान्यताएं और अवधारणाएं, वर्षों या सदियों पहले सही मान ली गई थीं, जरूरी नहीं कि हर युग में उनको उसी रूप में स्वीकार किया जाए। समय और परिस्थितियों से उपजे सवाल, उसे अपने मानकों पर कसते हैं। हालांकि सच यह भी है कि साहित्य और समाज में वर्षों से चली आ रही मान्यताओं और प्रतिमानों को खंडित करने का साहस यदा-कदा ही किया जाता है, क्योंकि बहुजन के दबाव और विरोध को सहकर अपनी बात कहने से प्रायः बुद्धिजीवी लोग बचने में ही अपनी भलाई समझते हैं। बावजूद इसके कुछ रचनाकार अपवाद रहे हैं।
सच को पूरे साहस से कहने वाली रचनाकारों में सम्मिलित मैत्रेयी पुष्पा ने इस पुस्तक के संकलित लेखों में कुछ ऐसा ही प्रयास किया है। ‘उसने कहा था’, ‘गोदान’, ‘चित्रालेखा’, ‘धु्रवस्वामिनी’, ‘त्यागपत्र’, ‘मैला आंचल’ और ‘राग दरबारी’ जैसी अपने समय की कालजयी रचनाओं को बिलकुल अलग निगाह से देखतीं और उसके स्त्री-पात्रों के मन में सोए पड़े सवालों को उघाड़कर उन्होंने एक नई बहस को आधार प्रदान किया है। इन कृतियों के संदर्भ में लेखिका द्वारा उठाए गए सवाल, न केवल पढ़ने वाले को बेचैन कर सकते हैं बल्कि इन्हें नए तरह से तबदील निगाहों के जरिए पुनर्मूल्यांकित करने की मांग भी करते हैं। 
कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके और कुछ अवसरों पर दिए गए इन वक्तव्यों में मैत्रेयी पुष्पा के भीतर की आलोचकीय दृष्टि भी सघन रूप से प्रकट हुई है। बनी-बनाई धारणाओं और अपनी कूपमंडूकता में आनंदित रहने वाले आलोचकों के लिए यह पुस्तक एक सबक की तरह हो सकती है।
–विज्ञान भूषण

Maitreyi Pushpa

मैत्रेयी पुष्पा
जन्म : 30 नवंबर, 1944, अलीगढ़ जिले के 'सिकुर्रा' गांव से
आरंभिक जीवन : जिला झाँसी के 'खिल्ली' गाँव में
शिक्षा : एम० ए० (हिंदी साहित्य) बूंदेलखंड कॉलेज, झाँसी
प्रकाशित रचनाएं : बेतवा बहती रही, इदन्नमम, चाक, झूला नट, अल्मा कबूतरी, विजन, अगनपाखी, कही ईसुरी फाग (उपन्यास); गोमा हंसती है, ललमनियाँ, चिन्हार (कहानी); कस्तूरी कुंडल बसै (आत्मकथा), खुली खिड़कियाँ (स्त्री-विमर्श)
- 'फैसला' कहानी पर टेलीफिल्म 'बसुमती की चिटूठी'
- 'इदन्नमम' उपन्यास पर आधारित साँग एंड ड्रामा डिवीजन द्वारा निर्मित छायाचित्र 'संक्रांति'
सम्मान-पुरस्कार : 'सार्क लिटरेरी अवार्ड' और 'द हंगर प्रोजेक्ट' द्वारा दिए गए 'सरोजिनी नायडू पुरस्कार' के अतिरिक्त अनेक राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पुरस्कारों से सम्मानित

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