Sampoorn Baal Vigyan Kathayen

Hari Krishna Devsare

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  • Year: 2018

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466627

जो बच्चे परीकथाएँ, भूत-प्रेतों की कहानियाँ आदि पढ़ते हैं, उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण जागृत होने में बाधा पड़ सकती है, क्योंकि वे अंधविश्वासी अधिक बन सकते हैं। और हमारे देश में अंधविश्वास ने अपनी जड़ें कितनी गहरी जमा रखी हैं कि यह वे लोग अच्छी तरह जानते हैं, जो विज्ञान-प्रसारक हैं। इसलिए मैं ऐसे बच्चों को सलाह दूँगा कि वे विज्ञान कथाएँ अवश्य पढ़ें, क्योंकि जब हम विज्ञान की नजर से कुछ पढ़ते हैं तो समझ में आ जाता है कि संभव क्या है, असंभव क्या है। विज्ञान कथाएँ उन्हें नई दृष्टि, नई सोच और भविष्य की सार्थक कल्पना देती हैं।"

बच्चों के लिए डॉ. हरिकृष्ण देवसरे विगत पचास वर्षों से विज्ञान लेखन कर रहे हैं। विज्ञान कथा लेखन में डॉ. देवसरे का प्रशस्य योगदान रहा है। आपके कई बाल विज्ञान उपन्यास ‘होटल का रहस्य’, ‘ला-वेनी’ आदि बहुत लोकप्रिय हुए। यहाँ उनकी संपूर्ण बाल विज्ञान कथाएँ प्रस्तुत हैं।  आशा है, यह प्रस्तुति सभी वर्ग के पाठकों के लिए रुचिकर और पठनीय सिद्ध होगी।

Hari Krishna Devsare

डॉ.  हरिकृष्ण देवसरे हिंदी के सुपरिचित लेखक हैं। हिंदी बाल-साहित्य पर हिंदी में प्रथम शोध प्रबंध प्रस्तुत कर बाल-साहित्य पर शोध की परंपरा का सूत्रपात करने में डॉ. देवसरे का बाल-साहित्य समीक्षा के क्षेत्र में प्रशंस्य योगदान है। मौलिक लेखक के रूप में डॉ.  देवसरे की बाल-साहित्य संबंधी तीन सौ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने विविध विधाओं में भी पर्याप्त साहित्य लिखा है। ‘खाली हाथ’ (उपन्यास), ‘अगर ठान लीजिए’ (चरित्र-विकास) आदि उनकी कुछ उल्लेखनीय पुस्तकें हैं। उसी क्रम में उनकी ये पुस्तकें हैं--‘अथ नदी कथा’ और ‘पर्वतगाथा’। शोधपरक लेखन डॉ. देवसरे की विशेषता है। मीडिया के लिए भी डॉ. देवसरे की सेवाएँ उल्लेखनीय हैं। लगभग चैबीस वर्ष तक आकाशवाणी में विभिन्न पदों पर कार्य करने के अतिरिक्त आपने दूरदर्शन के लिए दस से अधिक धारावाहिकों, बीस वृत्तचित्रों एवं दस टेलीफिल्मों का लेखन, निर्देशन एवं निर्माण भी किया।
डॉ.  देवसरे कई संस्थाओं से सम्मानित और पुरस्कृत हुए हैं। आपको ‘बच्चों में विज्ञान लोकप्रियकरण’ के लिए राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने ‘बाल-साहित्य भारती’ पुरस्कार से सम्मानित किया और हिंदी अकादमी, दिल्ली ने ‘साहित्यकार सम्मान’ दिया। आपको पद्मा बिनानी फाउंडेशन की बाल- साहित्य के उन्नयन को समर्पित संस्था ‘वात्सल्य’ द्वारा एक लाख रुपये के ‘प्रथम वात्सल्य पुरस्कार’ द्वारा सम्मानित किया गया। 

स्मृति शेष : 14 नवंबर, 2013

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