Swami Ram Tirath Ki Shreshtha Kahaniyan

Jagnnath Prabhakar

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 978-81-88125-46-3

स्वामी रामतीर्थ की श्रेष्ठ कहानियां जहाँ अत्यंत रूचि-मोहक है, वहां उसका दामन उज्ज्वल प्रेरणाओं और सुनहले शिक्षा-तत्वों से जगमगा रहा है तथा ह्रदय व मन को आलोकित किये देता है । 
प्रत्येक कहानी के अंत में कुछ शब्दों द्वारा कहानी में निहित शिक्षा-तत्त्व का संकेत दिया  गया है । यही ऐसा न किया जाता, तो इन कहानियों एवं स्वामी जी के उद्देश्य से न्याय नहीं हो सकता था । स्वामी जी ने प्रत्येक कहानी का उद्भावना केवल इसीलिए किया था की उसके रोचक माध्यम से अपने श्रोताओं एवं पाठकों के निकट विषय की गंभीरता तथा दुरूहता बोधगम्य व सरल हो जाये और साथ ही साथ शिक्षा के तत्त्व भी उजागर हो उठें । 

Jagnnath Prabhakar

श्री  जगन्नाथ प्रभाकर
जगन्नाथ प्रभाकर का  जन्म, जिला लायलपुर (वर्तमान पाकिस्तानस्थ, फैसलाबाद) के एक कस्बा के समृद्ध व्यापारी ब्राह्मण परिवार में हुआ, शिक्षा लायलपुर में ग्रहण  की । माता-पिता चाहते थे कि यह लड़का कॉलेज में न जाकर मंडी के कपड़ा व्यापार में अपने बडे भाई का साथ दे । परन्तु इन्हें इस काम में रुचि न थी । ये प्राय: सारा समय सामाजिक कार्यों और विशेषता कांग्रेस कमेटी के, जिसके यह सचिव थे, कार्यों में खपा देते थे । यह हालत देखकर इन्हें नहर के विभाग में एक अच्छी सरकारी नौकरी में लगवा दिया गया । परन्तु कुछ ही महीनों के बाद यह नौकरी भी छोड़ दी । इसके बाद लिखने-पढ़ने का शौक इन्हें लाहौर ले आया । जहाँ ये हिन्दी के साप्ताहिक पत्र "विश्वबन्धु" के मैनेजर नियुक्त हो गये और जब यह पत्र दैनिक हुआ, तो इन्हें समाचार विभाग और साप्ताहिक संस्करण का इंचार्ज बना दिया गया । इसके अतिरिक्त यह एक उर्दू साप्ताहिक 'ब्रह्म संदेश' का और विख्यात उर्दू धार्मिक पत्रिका "ओम" के विशेषांकों का सम्पादन भी करते रहे । पाकिस्तान बनने के बाद इन्हीं ने दिल्ली से उर्दू मासिक पत्रिका 'विज्ञान' का प्रकाशन आरभ किया । बालोपयोगी साहित्य का भी निर्माण किया है । इन्हें भारत सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से नवसाक्षरों के उपयोगी साहित्य की सातवी प्रतियोगिता से पुरस्कृत किया गया ।  यह बहुत वर्षों तक उर्दू दैनिक 'मिलाप' के विशेष धार्मिक कालम लिखते रहे ।

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