Kucch Yaaden Bachpan Ki

Ramdarash Mishra

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-93-8004-02-4

ये कहानियां बच्चों के लिए भी हैं और किशोरांे के लिए भी। अपनी जीवन-यात्रा में आए हुए कुछ मार्मिक प्रसंगों से मेंने ये कहानियां रची हैं। सभी के पात्र मनुष्य हैं। हां, दो कहानियां ऐसी हैं, जो शुद्ध काल्पनिक हैं और जिनके पात्र पशु हैं। मैंने चाहा है कि इन कहानियों से बच्चों का मनोरंजन तो हो ही, वे अपने वय की कुछ समस्याओं से रूबरू हों और उन्हें अच्छे जीवन-व्यवहार की सीख मिले।
—रामदरश मिश्र

Ramdarash Mishra

रामदरश मिश्र

जन्म : 15 अगस्त, 1924 को गोरखपुर (उ० प्र०) जिले के डुमरी गांव में
शिक्षा : एम०ए०, पी-एच०डी०

सर्जनात्पक रचनाएँ : 'पथ के गीत', 'बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ', 'पक गई है धूप’, 'कंधे पर सुरज', 'दिन एक नदी बन गया', 'मेरे प्रिय गीत', 'जुलूस कहाँ जा रहा है?', 'रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कविताएँ', 'आग कुछ नहीं बोलती', 'शब्द सेतु', 'बारिश में भीगते बच्चे', 'ऐसे में जब कभी', 'आम के पत्ते (काव्य-संग्रह) ० 'हंसी ओठ पर आँखें नम हैं', 'बाजार को निकले हैं लोग' (ग़ज़ल-संग्रह) 'पानी के प्राचीर' , 'जल टूटता हुआ', 'बीच का समय', 'सूखता हुआ तालाब', 'अपने लोग', 'रात का सफर', 'आकाश की छत', 'आदिम राग' (बीच का समय), 'बिना दरवाजे का मकान', ‘दूसरा घर', 'थकी हुई सुबह', 'बीस बरस' (उपन्यास) ० 'खाली घर', 'एक यह', 'दिनचर्या', 'सर्पदंश', 'वसंत का एक दिन', 'इकसठ कहानियां', 'अपने लिए', 'मेरी प्रिय कहानियां', 'चर्चित कहानियां', 'श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां', 'आज का दिन भी', 'फिर कब आएँगे ?', 'एक कहानी लगातार', 'विदूषक', 'दिन के साथ', 'मेरी तेरह कहानियाँ', 'दस प्रतिनिधि कहानियां', (कहानी-संग्रह) ० 'कितने बजे है', 'बबूल और कैक्टस', 'घर-परिवेश' (ललित निबंध-संग्रह) ० 'तना हुआ इंद्रधनुष', 'भोर का सपना', 'पडोस की खुशबू' (यात्रा-वर्णन) ० 'सहचर है समय', 'फुरसत के दिन' (आत्मकथा) ० 'स्मृतियों के छंद', 'अपने-अपने रास्ते' (संस्मरण) ० 'बूँद-बूँद नदी', 'दर्द की हंसी', 'नदी बहती है' (चुनी हुई रचनाएँ)।

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