Madhavi Kannagi

Chitra Mudgal

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-167-7

लगभग दो हजार वर्ष पुराना तमिल महाकाव्य ‘शिलप्पधिकारम्’ को विषय बनाकर मैं तुम्हारे लिए एक उपन्यास लिखना चाह रही थी। अचानक एक दिन एन. सी. ई. आर. टी. से डाॅ. रामजन्म शर्मा का फोन आया। उनका आग्रह हुआ कि ‘पढ़ें और सीखें’ योजना के अंतर्गत मैं बाल-पाठकों के लिए ‘शिलप्पधिकारम्’ को आधार बनाकर एक बाल-उपन्या लिखूं। किन्हीं कारणों से डाॅ. रामजन्म शर्मा के दुबारा आग्रह पर मुझे दूसरी पुस्तक लिखनी पड़ी। 
पिछले वर्ष संयोग से कंेद्रीय हिंदी निदेशालय के नव-लेखन प्रशिक्षण शिविर में दक्षिण जाना हुआ। वहां कुछ मित्रों ने उलाहना दिया कि तमिल साहित्य की समृद्धि के बारे में उत्तर भारत के बाल-पाठक कुछ नहीं जानते। बस, इस उलाहने ने मुझे बेचैन कर दिया। पुरानी इच्छा जाग उठी। पाण्डिचेरी से लौटकर मैंने ‘माधवी कन्नगी’ तुरंत लिखना शुरू कर दिया। उपन्यास पूरा हो गया।
—चित्रा मुद्गल

Chitra Mudgal

चित्रा मुद्गल 
व्यास सम्मान से सम्मानित 10 दिसंबर, 1944 को चेन्नई में जन्मी और मुंबई में शिक्षित चित्रा मुद्गल आधुनिक कथा-साहित्य की बहुचर्चित, सम्मानित और प्रतिनिधि रचनाकार हैं । प्रखर चेतना की संवाहिका चित्रा जी के पास अनुभवों का विपुल भंडार है । उन्होंने समाज के विभिन्न समुदायों, विशेषकर दलित-शोषितों के बीच पैठकर काम किया है । आंदोलनमुखी संगठनों से इनका गहरा नाता है । इनकी मान्यता है कि सामाजिक परिवर्तनों की दिशा से आंदोलनों की निर्णायक भूमिका है ।
दूरदर्शन के लिए टेलीफिल्म 'वारिस' का निर्माण तो चित्रा जी ने किया ही है, प्रसिद्ध कहानियों पर आधारित 'एक कहानी', 'मँझधार', 'रिश्ते' सरीखे धारावाहिकों में इनकी अनेक कहानियाँ सम्मिलित हुई है। चित्रा  जी की अनेक कहानियों पर टेतीफिल्मों का निर्माण भी हुआ है ।
समकालीन यथार्थ को यह जिस अद्धभुत भाषिक संवेदना के साथ अपनी कथा-रचनाओं में परत-दर-परत अनेक अर्थछवियों में अन्वेषित करती है, यह चकित कर देने वाला है। अब तक चित्रा मुद्गल के चौदह कहानी-संग्रह, तीन उपन्यास, तीन बाल-उपन्यास, चार बालकथा-संग्रह, पाँच संपादित पुस्तकें और दो वैचारिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं ।
इन्हें बहुचर्चित उपन्यास 'आवाँ' पर सहस्त्राब्दि का पहला अंतर्राष्टीय 'इंदु शर्मा कथा सम्मान' लंदन (इंग्लैड) में पाने का गौरव प्राप्त हुआ । चित्रा जी को बिड़ला फाउंडेशन का 'व्यास सम्मान', हिंदी अकादमी, दिल्ली का 'साहित्यकार सम्मान', विकास काया फाउंडेशन द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए 'विदुला सम्मान' और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा 'साहित्य भूषण सम्मान' से समलंकृत किया गया है।

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