Sushila

Manorma Jafa

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-88236-56-5

सुशीला
लंदन में बफाँली हवा चल रहीं श्री। सुशीला को इसका अनुमान नहीं था। उनको लन्दन के घर में ले जाने के लिए कुछ सांग उनके स्वागत के लिए खड़े थे। लंदन में चारों तरफ गोरे-गोरे लोग थे और सबके हाथों में छाता था ।
लंदन की हबा सुशीला को बडी मनभावनी लगी। भविष्य में विलायत की सब यादें उनके साथ सदा बनी रहें इसलिए वह बाजार गई और उन्होंने सबसे पहले एक कैमरा और कैमरे की रील खरीदी। उसी दुकानदार ने उन्हें कैमरे के बारे में भी विस्तार से बताया, साथ ही साथ कैमरे में फोटो खौब्वेनै की रील भी लया दो। बच्चे सुशीला के पथ थे, वह उसी समय लंदन के ट्रफात्नार स्ववायर में गई। ट्रफग्लार स्वचायर के मैदान में अनगिनत कबूतर जाना चुग रहैं थे। सुहावना मौसम था । सुशीला ने अपनी बेटी को उनके बीच में बैठा दिया। सब सामान बेटे को पकड़। दिया और सबसे पहले कबूतरों के बीच में जैसी हूई बिटिया की तस्वीर खंचि ली।
अगले दिन वह बच्चों को लेकर लंदन के अजायबघर जू) में गई। तरह-तरह के जानवर देखकर बच्चे बडे खुश हुए ।

Manorma Jafa

मनोरमा जफा
श्रीमती मनोरमा जफा एक सुप्रसिधद्ध लेखिका हैं। आपकी कहानियाँ 'धर्मयुग', 'कादम्बिनी' व 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' में प्रकाशित हुई हैं। एक कहानी-संग्रह 'परिचित्ता तथा अन्य कहानियाँ' तथा एक उपन्यास 'देविका' 'किताबघर प्रकाशन' से प्रकाशित हुए हैं। 'देविका' को हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा साहित्य कृति सम्मान से सम्मानित किया गया है। आपकी कृतियों में संवेदनशील भावनाओं तथा समाज के बंधनों से बंधी, परिस्थितियों से जूझती हुई स्त्री के मर्मभेदी वर्णन हैं, जो पाठकों को पुन: विचार करने के लिए बाध्य कर देते हैं। आपका बाल-साहित्य में बड़ा योगदान रहा है। आप बाल-साहित्य विशेषज्ञ हैं  और तीन दशक से बल-साहित्य लेखन कार्यशाला का संचालन कर आपने भारत में बाल-साहित्य को एक नई दिशा दी है। आप हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में लिखती हैं। आपकी अनेक बाल-पुस्तकों का विदेशी भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है व पुरस्कृत हुई हैं।

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