Sant Raidas

Chandrika Prasad Sharma

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9789380048062

दलित वंश में संभूत रैदास अपने समय में एक श्रेष्ठ चमत्कारी संत माने जाते थे। उनका आदर राजा से लेकर रंक तक करते थे। रैदास विचित्र संत थे। वे जूते सिलते जाते थे और भजन गुनगुनाते जाते थे। उनका अधिकांश काव्य इसी प्रकार रच गया ।
संत रैदास का जीवन आर्थिक तंगी में कटा, किंतु उन्होंने किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया । उन्हें पारस पत्थर तक प्राप्त हुआ। वे चाहते तो चाहे जितना सोना बना लेते किंतु उन्होंने उस पारस पत्थर का उपयोग कभी नहीं किया । वे अत्यंत संतोषी जीव थे। फाकेमस्त और फक्कड़ रैदास चमत्कारी संत थे।
यह विशेष उल्लेख्य है कि वे इतने यशस्वी बन गए कि चर्मकार बिरादरी अपने आप को 'रैदास' कहने लगी। आज भी गाँवों में चर्मकार अपने को रैदास बताते हैं।
धन्य थे रैदास ! पूज्य थे रैदास !!

Chandrika Prasad Sharma

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