Parvatiya Sanskriti Main Shiv Shakti

Sudarshan Vashishath

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  • Year: 2018

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Suhani Books

  • ISBN No: 978-93-80927-39-8

शिव और शक्ति आदि देव रहे हैं हमारी संस्कृति के। हर पर्वत शिखर शिव का प्रतीक है तो हर घाटी में देवी पार्वती अपने अलग-अलग रूपों में विद्यमान है। किन्नर कैलास और मणिमहेश की कठिन यात्राएँ प्रसिद्ध हैं जो शिव के मूल स्थान की खोज में हजारों फुट की ऊँचाई तक हर वर्ष की जाती हैं। उधर पुराने समय में मणिकर्ण पहुँच पाना भी सुगम नहीं था। हालाँकि मंडी राज्य में प्रमुख देवता माधोराव रहे हैं किंतु यहाँ महाशिवरात्रि का उत्सव सात दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। वैद्यनाथ धाम, प्रसिद्ध शिव मंदिर मसरूर आदि ऐसे स्थान हैं जो पुरातन काल से शिव उपासना के सिद्धपीठ बने हुए हैं।
यदि हिमाचल प्रदेश का ऊपरी भाग देव भूमि है तो निचला क्षेत्र ‘देवी भूमि’ है जहाँ शक्ति अपने अनेक रूपों में विद्यमान है। शक्ति की स्थापना चंडीगढ़ से आरंभ हो जाती है जहाँ चंडी मंदिर है। उसके साथ ही प्रसिद्ध मनसा देवी और फिर कालका। उससे ऊपर तो समस्त भूभाग देवीमय हो गया है। श्री नैना देवी, चिंतपूर्णी माता, श्री ज्वालामाई, वजे्रश्वरी, चामुंडा—न जाने कितने ही स्थान हैं जहाँ देवी किसी न किसी रूप में विद्यमान है। इस ओर कामाक्षा देवी, भीमाकाली तो उस ओर लक्षणा देवी और आदिशक्ति।
हिमालय के इस पर्वतीय क्षेत्र में एक सशक्त देव परंपरा की व्यवस्था है। यहाँ देवी और देवता को सामान्यतः ‘देउ या देवता’ ही संबोधित किया जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में देवता का संस्थान बहुत शक्तिशाली है जो सामाजिक जीवन के हर पहलू को नियोजित करता है। धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक; कोई भी क्षेत्र हो, देव का संस्थान उसे संचालित करता है। हर देवता का अपना क्षेत्रा होता है जिसे ‘शासन’ कहा जाता है।
प्रस्तुत पुस्तक में शिव व शक्ति के प्रमुख व प्रसिद्ध स्थानों के अलावा कुछेक ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों के देवों को भी सम्मिलित करने का प्रयास किया गया है।

Sudarshan Vashishath

सुदर्शन वशिष्ठ
जन्म  : 24 सितंबर, 1949, पालमपुर (हि०प्र०) के एक गाँव में
प्रकाशान : 'अंतरालों में घटता समय’, 'सेमल के फूल', 'पिंजरा', 'हरे-हरे   पतों का घर', 'संता  पुराण', 'कतरनें' (कहानी-संग्रह); चुनिंदा कहानियों के तीन संग्रह प्रकाशित; 'आतंक', 'सुबह की नींद’ (उपन्यास) 'युग परिवर्तन, 'अनकहा' (काव्य-संकलन); 'अर्द्धरात्रि का सूर्य’ , 'नदी और रेत’ (नाटक); 'व्यास की धारा', 'कैलास पर चाँदनी', 'पर्वत से पर्वत तक', 'रंग बदलते पर्वत', 'पर्वत मंथन', 'हिमाचल', 'हिमाचल की लोककथाएँ', 'ब्राह्यणत्व : एक उपाधि', 'पुराण गाथा', 'देव संस्कृति' (संस्कृति शोध तथा यात्रा) 'हिमाचल संदर्भ कोष' (आठ खंडों में शीघ्र प्रकाशित)
दो काव्य-संकलन, चार कहानी-संग्रहों का संपादन । तीन पत्रिकाओं  तथा चार दर्जन से ऊपर सरकारी पुस्तकों का संपादन देश की वर्तमान तथा विगत शीर्षस्थ पत्र-पत्रिकाओँ में रचनाएँ प्रकाशित
जम्मू अकादमी, हिमाचल अकादमी, साहित्य कला परिषद दिल्ली सहित कई स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा साहित्य-सेवा के लिए सम्मानित

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