Aanvla Or Uski Baagbani

Darshna Nand

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Himachal Pustak Bhandar

  • ISBN No: 978-81-88123-02-5

वास्तव में आंवले का ताजा फल भी सीमित मात्रा में ही खाया जा सकता है । मुरब्बे के अतिरिक्त इसके अनेक उत्पाद भी निर्माण किये जाते हैं । इसकी उपयोगिताएं अनन्य हैं । यह औषधीय गुणों का भंडार है । 
इस विशिष्ट फल पर कोई संकलित साहित्य उपलब्ध नहीं था, जिससे इसकी वैज्ञानिक विधि से बागबानी करने और इसके उपयोग करने में सहायता मिल पाती । प्रस्तुत की पुस्तक की हिंदी में रचना करके लेखक ने इन अभावों की पूर्ति की है । 

Darshna Nand

दर्शना नन्द
जन्म : 3 जुलाई, 1930
शैक्षिक योग्यता : एम०एस-सी० (कृषि), उद्यान विभाग (दो वर्ष की शोध थीसिस सहित) गवर्नमेंट एग्रीकल्चरल कॉलेज, कानपुर से 1952 में ।
अमरूद को किस्म 'इलाहाबाद सुर्खा' (बाहर-भीतर लाल) का स्वयं द्वारा चयन । इसके 24 बडेड पौधे एक-चौथाई एकड़ भूमि में 30 जुलाई, 1988 को खुसरोबाग, इलाहाबाद में स्थापित ।
36 वर्षों से अधिक के अनुभवों के पश्चात् उपनिदेशक उद्यान, इलाहाबाद मंडल (उद्यान विभाग, उत्तर प्रदेश), इलाहाबाद के पद से संयुक्त निदेशक, उद्यान के वेतनमान (समयमान) में 31 जुलाई, 1988 को सेवानिवृत ।
विज्ञान परिषद, प्रयाग द्वारों डॉ० गोरखप्रसाद विज्ञान पुरस्कार व विज्ञान वाचस्पति की उपाधि व चिह्न द्वारा सम्मानित ।
प्रथम इंडियन हॉर्टीकल्चर काग्रेस 2004, नई दिल्ली, तृतीय इंडियन हॉर्टीकल्चर कांग्रेस 2008, भुवनेश्वर व ग्लोबल पोटैटो कॉन्ग्रेस 2008, नई दिल्ली में चिहों द्वारा सम्मानित ।
औद्यानिक विषयों पर गहन अध्ययन एवं लेखन, बागवानी, प्रदूषित पर्यावरण एवं तंबाकू निषेध में रुचि व क्रियात्मक अनुभव । आल इंडिया रेडियो, इलाहाबाद, गोरखपुर, लखनऊ, नई दिल्ली में औद्यानिक विषयों पर वार्ता । आल इंडिया रेडियो, इलाहाबाद के लगभग स्थायी वार्ताकार ।
दूरदर्शन, नई दिल्ली, लखनऊ, इलाहाबाद के पूर्व सजीव व ध्वनिकरित वार्ताकार उद्यान विज्ञान संबंधी 18 पुस्तकों/पुस्तिकाओं तथा 25 शोधपत्रों व अनेकानेक औद्यानिक, पर्यावरण, धूम्रपान के सामान्य लेखों के रचयिता।

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