Bharat Ke Ateet Ki Khoj

Om Prakash Kejariwal

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
550.00 468 + Free Shipping


  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789380146034

भारत के अतीत की खोज
आज का करीब-करीब हर शिक्षित भारतवासी सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त, समुद्रगुप्त, कनिष्क तथा बुद्ध जैसे ऐतिहासिक चरित्रों से परिचित है, परंतु जो बात अधिकतर शिक्षाविद् तथा विद्वान् अभी भी नहीं जानते, वह यह है कि करीब 200 वर्ष पहले ये सभी नाम या तो अपरिचित थे या इनके बारे में बहुत कम जानकारी थी। वस्तुतः 18वीं शताब्दी के आते-आते भारत अपने इतिहास को विस्मृति के गर्भ में खो चुका था। एक प्रकार से हम कह सकते हैं कि 18वीं शताब्दी में हमारे पास एक समृद्ध अतीत तो था, परंतु इतिहास नहीं। यह अतीत किस प्रकार हमारे इतिहास में परिवर्तित हुआ, यही इस पुस्तक का मूल विषय है।
इस काम को करने वाले महत्त्वपूर्ण अंग्रेज विद्वान् थे--सर विलियम जोन्स, जिन्होंने 1784 में कलकत्ता में एशियाटिक सोसायटी की स्थापना की, जो इन सारे अध्ययनों का केंद्र बनी। इसी के अंतर्गत आधी शताब्दी के दौरान जो काम हुआ, उसके परिणाम-स्वरूप ही हमारा अधिकांश प्राचीन इतिहास प्रकाश में आया।
प्रस्तुत पुस्तक में इसी आधी शताब्दी की कहानी है। साथ ही इसमें इस विषय की भी विवेचना है कि ये सभी विद्वान् अपने अध्ययन-कार्यों में मात्रा साम्राज्यवाद की भावना से प्रेरित थे अथवा नहीं।

Om Prakash Kejariwal

डॉ. ओम प्रकाश केजरीवाल 
सन् 1944 में जन्मे डॉ. ओम प्रकाश केजरीवाल की प्रारंभ से ही पढ़ने-लिखने में रुचि रही। 1966 में भारतीय सूचना सेवा में प्रवेश करने के बाद उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर काम किया। सेवाकाल के अंतिम चरण में प्रकाशन विभाग के निदेशक, आकाशवाणी के महानिदेशक, प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी तथा नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं लाइब्रेरी के निदेशक जैसे पदों पर रहने के बाद सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्रथम पाँच सूचना आयुक्तों में से एक रहे। भारतीय प्राच्य विद्या में उनकी गहनतम रुचि रही है। नेहरू फैलोशिप प्राप्त डॉ. केजरीवाल को ब्रिटेन की रॉयल एशियाटिक सोसायटी की फैलोशिप भी मिली। उनकी पुस्तक ‘द एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल एंड द डिस्कवरी ऑफ इंडियाज़ पास्ट’ की भूमिका लिखते हुए प्रख्यात भारतविद् एॉएलॉ बैशम ने उनकी पुस्तक को पूरे विश्व के सुधी पाठकों के लिए पठनीय पुस्तक की संज्ञा दी। प्रस्तुत पुस्तक का अंग्रेजी मूल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से प्रकाशित हुआ। उनकी एक और पुस्तक ‘ग़ालिब के सौ अंदाज़’ काफी चर्चित रही।

Scroll