Sachitra Vigyan Va Praudyogiki Vishvakosh (3 Vols.)

Vinod Kumar Mishra

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
1,950.00 1755 + Free Shipping


  • Year: 2008

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788189859565

सचित्र विज्ञान व प्रौद्योगिकी विश्वकोश (3 खंडों में)
प्रसिद्ध फ्रांसीसी गणितज्ञ आलेम्बर्त के विषय में कहा गया, "इसकी प्रतिभा फ्रांसीसी विश्वकोश ( 1751-1780) के प्रणयन में अधिक काम आई।" दूसरे शब्दों में गणित की खोजों की कीमत में भाषा की सेवा हो गई। ऐसा भारतीय भाषाओं के संदर्भ में हो ही नहीं सकता, क्योंकि भाषा-सेवा को यहाँ दोयम दर्ज का काम समझा जाता है। यूरोप में भाषा-सेवा देश-सेवा का पर्याय मानी जाती रही, जिस कारण वहाँ विश्वकोशों की परंपरा सदियों पुरानी है। अंग्रेजी के प्रसिद्ध विश्वकोश 'ब्रिटानिका' का प्रथम संस्करण 1768-1771 में छपा था।
हिंदी प्रदेश में बीसवीं सदी के आरभ में हिंदी ‘शब्द-सागर को योजना हाथ में ली गई। इसमें तत्कालीन हिंदी के मूर्धन्य आचार्य जुट गए। कार्य को दिशा मिल गई और शब्दकोश-निर्माण की अच्छी परंपरा विकसित हो गई । आज हिंदी में अनेक अच्छे शब्दकोश हैं, यह बात विश्वकोशों के विषय में नहीं कहीं जा सकती। विश्वकोश-निर्माण के भी अनेक प्रयास हुए, पर सामूहिक प्रयासों से इस विधा का क्रमिक विकास नहीं हो पाया। संस्थागत और व्यक्तिगत  प्रयासों से व्यापक या विषयवार दोनों प्रकार के विश्वकोशों का निर्माण हुआ । 
व्यक्तिगत प्रयास से बने विश्वकोश का एक उदाहरण प्रस्तुत पुस्तक श्रृंखला है। इसके प्रणेता सिद्धहस्त हिंदी लेखक श्री विनोद कुमार मिश्र एक इंजीनियर हैं। इनकी कर्मठता और लगन ने इस ग्रंथ को आकार दिया है। फिर भी मानना पड़ता है कि इनका ज्ञान इंजीनियरी और भौतिक विज्ञानों तक ही सीमित था। सौभाग्य से पुनरीक्षक ऐसे मिल गए, जिनको कोशकला का पर्याप्त अनुभव था और वे जीव विज्ञानों के अध्येता रहे। प्रकाशक ने भी विलक्षण धैर्य और साहस का परिचय दिया । इन सभी सकारात्मक कारकों के योगदान से एक अच्छे ग्रंथ का सृजन संभव हो पाया।

Vinod Kumar Mishra

विनोद कुमार मिश्र
जन्म : 12 जनवरी, 1960 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले  में। साढ़े तीन वर्ष की आयु में पोलियोग्रस्त ।स्कूली शिक्षा राँची में । रुड़की विश्वविद्यालय से 1983 में इलेक्ट्रॉनिक्स व दूरसंचार इंजीनियरिंग में स्नातक । बिजनेस प्रबंध में स्नातकोत्तर उपाधि । संप्रति वरिष्ठ तकनीकी प्रबंधक, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, साहिबाबाद ( भारत सरकार का उद्यम) । समाज-सेवा में प्रारंभ से ही रूचि ।  विकलांग व्यक्तियों के लिए कानून बनवाने हेतु लम्बा संघर्ष।  1994 में सांसद श्री प्रेम के जरिए लोकसभा में विकलांगों के कल्याणार्थ निजी विधेयक पेश कराया । 1993 में भारतीय विकलांग संस्थान द्वारा 'विकलांग भूषण' की उपाधि । 1996 में भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट विकलांग कर्मचारी के रूप में चयन । 3 दिसम्बर, 1996 को राष्ट्रपति पदक मिला । 1984 से कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के क्षेत्र में कार्य । राष्ट्रीय  दैनिक पत्रों व पत्रिकाओं में नियमित लेखन और दूरदर्शन पर विकलांगों के कार्यक्रम 'साथ-साथ' में नियमित रूप से हिस्सेदारी । अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं से संबद्ध ।
प्रकाशित रचनाएँ :-
०  विकलांगता : समस्याएँ व समाधान
० अपंगता से मुकाबला
० कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइतियाँ : एक आंदोलन 
० भारत में विकलांगों की स्थिति और विकलांग कानून, 1995
० विकलांगता की समस्या और विकलांग कानून, 1995 (ब्रेल में)

आगामी कृतियाँ-
० Disabled Dignitories Of World
० तूफान में जलते दीए

Project Reports-
० Assessing Market Opportunities Of Mobile Communication In India.
० Solar Energy & Its Economic Viability
० Study Of Impact Of Globalisation & Recession In South Asian Countries On Indian Export Market.

Scroll