Vyangya Samay : Ravindranath Tyagi (Paperback)

Ravindra Nath Tyagi

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  • Year: 2017

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-934394-1-8

रवीन्द्रनाथ त्यागी का रंग व्यंग्य में सबसे निराला है। उनका अध्ययन व्यापक था। स्मृति अच्छी होने से संदर्भ सामने रहते थे। संदर्भों को प्रसंग देकर रचने की विलक्षण योग्यता उनके पास थी। यही कारण है कि त्यागी के व्यंग्य पढ़ते हुए पाठक को आनंद के साथ ज्ञान भी उपलब्ध होता है। बतरस इतना है कि गांव की गोरी पर लिखते हुए प्राकृत से लेकर पेरिस तक अभिव्यक्ति का विस्तार हो सकता है। व्यंग्य में सहज हास्य के वे आचार्य हैं। दफ्रतरशाही,  शृंगार, प्रकृति और अद्भुत तथ्य–प्रायः इन क्षेत्रों से वे विषय चुनते हैं। संस्कृत और अन्य भाषाओं से उद्धरण देते हुए त्यागी व्यक्तिगत समस्याओं से लेकर राष्ट्रीय प्रश्नों तक बात करते हैं। कई बार लगता है कि उनके लेखन का उद्देश्य निर्मल हास्य की सृष्टि करना है। यह कठिन काम उन्होंने सरलता से किया है। हास्य में आ जाने वाली दुराग्रही वृत्ति उनके लेखन में नहीं है। वे सिद्धांतो से नहीं, आसपास के तथ्यों या व्यक्ति वैचित्रय से हास्य के क्षण निर्मित करते हैं। ‘व्यंग्य समय’ में रवीन्द्रनाथ त्यागी के चयनित व्यंग्य उनके विस्तृत व्यंग्य लेखन से कुछ उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। पाठकों को रचनाकार को समग्रता में पढ़ने और पुनः पाठ के लिए प्रेरित करने का उद्देश्य भी इस उपक्रम में निहित है।

Ravindra Nath Tyagi

रवीन्द्रनाथ त्यागी
जन्म: 9 मई, 1930, नेहेटौर, जिला-बिजनौर (उ. प्र.)
शिक्षा: 1954 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्रा में एम. ए. (गोल्ड मेडलिस्ट)
प्रमुख प्रकाशित रचनाएं: भित्तिचित्र, मल्लिनाथ की परंपरा, देवदार के पेड़, शोक-सभा, अतिथि कक्ष, फूलों वाले कैक्टस, ऋतु वर्णन, आत्मलेख, अपूर्ण कथा, पदयात्रा, हमारे मास्टर साहब, प्रतिनिधि रचनाएं, पराजित पीढ़ी के नाम, प्रसंगवश, विष कन्या, गणतंत्रा दिवस की शोभायात्रा, चंपाकली, इतिहास का शव, देश विदेश की कथा, भाद्रपद की सांझ, लाल पीले फूल, पूरब खिले पलाश, सूखे और हरे पत्ते, कल्पवृक्ष, आदिम राग, कृष्णपक्ष की पूर्णिमा, सुंदर वन, बादलों का गांव, कबूतर कौए और तोते, पीले पाल वाली बूढ़ी नाव, यक्ष-प्रश्न, वसंत से पतझड़ तक, रवीन्द्रनाथ त्यागी रचनावली (संपादन डाॅ. कमलकिशोर गोयनका)
प्रमुख सम्मान/पुरस्कार: उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा तीन बार पुरस्कृत, चकल्लस पुरस्कार, टेपा पुरस्कार, श्रीनारायण चतुर्वेदी पुरस्कार, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पुरस्कार, अट्टहास शिखर सम्मान, व्यंग्यश्री पुरस्कार, शरद जोशी सम्मान, हरिशंकर परसाई पुरस्कार आदि
निधन : 4 सितंबर, 2004

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