Aangan Ka Shajar

Mamta Kiran

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  • Year: 2020

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-89663-11-2

ममता किरण की ग़जलों में कथ्य का दायरा बहुत विस्तृत है, उनमें घर-परिवार से लेकर पूरी दुनिया शामिल है। कथ्य के बड़े दायरे के साथ-साथ, नयी-नयी उपमाओं, बिंबों और नयी कहन तथा आधुनिक संदर्भों का कुशलता से शेरों में पिरोना भी उनका ग़जलगोई को विशिष्टता प्रदान करता है। वर्तमान दौर, व्यवस्था द्वारा पैदा की गई विसंगतियाँ, विडंबनाएँ ममता किरण के शेरों में बेबाकी से अभिव्यक्त हुए हैं

एक रोटी को चुराने की मुक़र्रर है सजा

मुल्क़ जो लूट लो, उसकी कोई ताजीर नहीं।

हालात ज्यों के त्यों ही रहे मेरे गाँव के

काग़ज पे ही विकास की, दिल्ली ख़बर गई।

आम इन्सानों के दुःख-दर्द को स्वर देने वाले, समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करने वाले, समाज को सही संदेश देने वाले शेर भी प्रभावित करते हैं

बहुत से ख़्वाब लेकर शह्र में आया था वो एक दिन

मगर दो वक़्त की रोटी बमुश्किल ही जुटाता है।

बाग जैसे गूँजता है पंछियों से

घर मेरा वैसे चहकता बेटियों से।

निरंतर संवेदनशील होते जा रहे समय में, अपने शेरों में संवेदनाओं को सहेजने का प्रयास भी सराहनीय है

बिटिया तू रसोई से जरा दाने तो ले आ

इक आस में बैठा है परिदा मेरे आगे।

कच्चा मकाँ तो ऊँची इमारत में ढल गया

आँगन में वो जो रहती थी चिड़िया किधर गयी।

बदले हुए दौर, रिश्तों का बदला हुआ रूप भी कवयित्री के शेरों में उभरकर आया है

नगर में जब से बच्चे रह गये और गाँव में दादी

लगाए कौन फिर आवाज, परियों को बुलाने की।

जहाँ कुछ निहित स्वार्थ सांप्रदायिकता और नप़फ़रत का जहर घोल रहे हों, वहाँ राष्ट्रीय एकता एवं प्रेम का संदेश देना कविता का धर्म है, जिसे कवयित्री ने निभाया है

मुल्क़ सबका है, कोई आपकी जागीर नहीं।

सकारात्मकता का संदेश देने वाले, हिम्मत और हौसला बढ़ाने वाले शे, प्रेरणा देनेवाले शे, किसी भी संग्रह के पाठकों के लिए उपहार जैसे होते हैं

खुदकुशी करने में कोई शान है

जी के दिखला तब कहूँ इन्सान है।

इक शजर ख़ुद्दार टकराने को था तब

थी चुनौती सामने जब आँधियों से।

किसी भी ग़जल संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता तो यही होती है कि उसमें ऐसे कितने शेर हैं जो जिदगी को आसान बनाने वाले मशविरे देते हैं। इस संग्रह में ऐसे शेर ख़ूब मिलते हैं

मंजिल मिलेगी तुझको मगर ध्यान ये रहे

अर्जुन की भाँति लक्ष्य पे तेरी निगाह हो।

जब कवयित्री का संग्रह हो तो नारी विमर्श के शेर मिलने स्वाभाविक हैं

एक निर्णय भी नहीं हाथ में मेरे बेटी

कोख मेरी है मगर कैसे बचा लूँ तुमको।

जिस ग़जल विधा में कभी प्रेम का ही प्रमुख स्वर होता था उसमें बेशक सामाजिक सरोकार प्रमुख विषय बन गए हों पर प्रेम के बिना कविता कहाँ संभव है

दिन प्यार का नहीं है फ़क़त चौदह फरवरी

दिन प्यार के सभी हैं, अगर दिल में चाह हो।

ममता किरण का यह ग़जल संग्रह निश्चय ही ग़जल के कारवाँ को आगे ले जाने वाले संग्रहों में शुमार होगा।

Mamta Kiran

ममता किरण
हिंदी की लगभग सभी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं---‘हंस’, ‘पूर्वग्रह’, ‘इंडिया टुडे’ (स्त्री), ‘जनसत्ता साहित्य विशेषांक’, ‘कादम्बिनी’, ‘साहित्य अमृत’, ‘गगनांचल’, ‘अक्षर पर्व’, ‘अमर उजाला’, ‘नई दुनिया’ आदि में कविताएँ प्रकाशित। सैकड़ों लेख, साक्षात्कार, पुस्तक समीक्षाएँ आदि समाचार-पत्रों में प्रकाशित। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नेशनल ओपन स्कूल आदि के लिए आलेख लेखन। आकाशवाणी-दूरदर्शन के लिए डाक्यूमेंट्री लेखन। 
‘ग़ज़ल दुष्यंत के बाद’, ‘परिचय राग’, ‘101 चर्चित कवयित्रियाँ’, ‘जान-ए-ग़ज़ल’, ‘सफ़र जारी है’, ‘छन्द अन्न’ आदि अनेक संग्रहों में ग़ज़लें और कविताएँ संगृहीत। 
देश-विदेश की हिंदी वेब पत्रिकाओं यथा--‘कविता कोश’, ‘अनुभूति’, ‘साहित्य-कुंज’, ‘वाटिका’, ‘साहित्य-सृजन’, ‘रेडियो सबरंग’ आदि में रचनाएँ प्रकाशित।
सार्क लेखक सम्मेलन, भारत-फ्रांस कविता महोत्सव (दिल्ली), भारतीय साहित्य अकादेमी, ग़ालिब अकादमी, राजस्थान साहित्य अकादमी, इंडियन सोसायटी ऑफ ऑथर्स, पोएट्री सोसायटी ऑफ इंडिया जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा रचना-पाठ के लिए आमंत्रित।
आकाशवाणी, दूरदर्शन एवं निजी टी० वी०  चैनलों से कविताओं का प्रसारण ०  प्रतिष्ठित लालकिला कवि-सम्मेलन समेत देश-भर के अनेक अखिल भारतीय कवि-सम्मेलनों एवं मुशायरों में शिरकत।
राष्ट्रीय समाचार-पत्रों जैसे ‘राष्ट्रीय सहारा’ तथा निजी टी० वी०  चैनल आदि से संबद्ध रहने के बाद फिलहाल स्वतंत्र पत्राकारिता और लेखन, आकाशवाणी में समाचारवाचिका, उद्घोषिका एवं कम्पीयर (अनुबंध के आधार पर)।
सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं की संस्था द्वारा ‘कवितायन सम्मान’, परिचय साहित्य परिषद् द्वारा ‘साहित्य सम्मान’, ‘उद्भव सम्मान’, दूरदर्शन के लिए लिखी एक डाक्यूमेंट्री को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान।

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