Guftgoo : Sarhadon Ke Aar-Paar

Prem Kumar

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789383233137

गुफ्तगू : सरहदों के आर-पार
प्रेमकुमार की यह पुस्तक अपनी भिन्न विशिष्ट पद्धति और अभिव्यक्ति वाले साक्षात्कारों के माध्यम से पांच देशों के सात स्थापित-सुविख्यात साहित्यजीवियों की जिंदगी और लेखन के अनेक अनसुने-अनजाने प्रसंगों-हिस्सों से सहज-दिलचस्प ढंग से पाठक का परिचय कराती है। पांच देश-भारत, आस्ट्रिया, ईरान, पाकिस्तान और अमेरिका।  सात साहित्यजीवी--नैयर राही, आंद्रेयास वेबर, अली मुहम्मद मुअज्जनी, सलीमा हाशमी, अहमद फराज, इंतिजार हुसेन और मुनीबुरर्हमान। 
इन बातचीतों के माध्यम से रचनाकारों के परिवेश, लेखन और लेखन-प्रक्रिया के बारे में तो आसानी और सहजता के साथ जाना-समझा जा ही सकेगा, भिन्न-भिन्न देशों व भाषाओं के पारस्परिक संबंधों, उनके बीच की सामाजिक-सांस्कृतिक समानताओँ-असमानताओँ, समस्याओं-संभावनाओं आदि को भी समझने-सुलझाने या विवेचित-विश्लेषित करने में मदद भी मिलेगी। तमाम तरह की बाडों-सीमाओं को लांघ-पारकर कोई सृजन या अभिव्यक्ति कैसे यहां-वहां सब कहीं स्वीकृत- समादृत हो पाते हैं-ऐसे कुछ सूत्रों-प्रश्नों के मूल और हल भी इन संवादों में ढूंढे-तलाशे जा सकते हैं ।
अत्यंत अनौपचारिक, आत्मीय और विश्वासपूर्ण वातावरण में अप्रत्याशित ढंग से संभव-संपन्न हुई इन बातों- मुलाकातों का एक अहम और उल्लेख्य पक्ष यह भी है कि सात में से पांच बातचीतें सीधे-सीधे संबंधित साहित्यकारों से हुई हैं, जबकि दो रचनाकारों के जीवन-लेखन को उनके दो अत्यंत करीबी संबंधों के सोच और दृष्टि से जाना-समझा गया है। राही मासूम रजा की पत्नी नैयर राही ने अपने सर्जक-पति और फैज अहमद 'फैज' की बडी बेटी सलीमा हाशमी ने अपने रचनाकार पिता के जीने-सोचने, लिखने तथा उनके जीवन-मूल्यों, अभावों, संघर्षों आदि के बारे में बातों-बातों में बहुत कुछ समझा-बता देना चाहा है।
निश्चय ही ये बातचीतें सुधी पाठकों, साहित्यसेवियों एवं शोधार्थियों के लिए पठनीय और उपयोगी सिद्ध होगी ।

Prem Kumar

प्रेमकुमार
जन्म : 3 फरवरी, 1952, चौढेरा, बुलंदशहर (उ.प्र.) शिक्षा : पी-एच.डी. (हिंदी) दिल्ली विश्वविद्यालय। प्रमुख कृतियां : 'एक बूढा रोशनदान', 'श्रद्धा का ताजमहल', 'बडे पापा प्लीज़' और 'प्रेमकुमार की प्रतिनिधि कहानियां' (कहानी-संग्रह) ० 'एक मस्त फकीर : नीरज', 'शऊर की दहलीज़', 'अंतम् के आजपर', 'जने अजीब : नासिरा शर्मा' एवं 'बातों-मुलाकातों में शहरयार' ( साक्षात्कार )
अनेक रचनाओं का कई भारतीय भाषाओँ में अनुवाद एवं कुछ का नाट्यरूपांतरण आकाशवाणी केंद्र से प्रसारित ।
स्तरीय समाचारपत्रों-पत्रिकाओं में कहानियों, साक्षात्कारों, आलेखों, समीक्षाओं, टिप्पणियों आदि का अनवरत प्रकाशन। 
कुछ पुस्तकों का संपादन-सहसंपादन तथा दर्जनों पुस्तकों के लिए सहयोगी लेखन ।
कथा साहित्य पर आधा दर्जन से अधिक आलोचना-ग्रंथ।

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