Malyalam Ke Mahaan Kathakaar : Srijan-Samvaad

Dr. Arsu

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  • Year: 2006

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788188466450

मलयालम के महान कथाकार : सृजन-संवाद
अन्तर्सबंधों की मजबूती से ही संस्कृति टिकाऊ बनेगी । कला और संस्कृति के माध्यम से ही यह प्रक्रिया संभव  होगी । भाषायी अजनबीपन के कोहरे को मिटाने पर ही मानवीय सोच-संस्कार का क्षितिज विशाल बनेगा ।
बहरहाल भाषायी कठमुल्लेपन को हटाकर हम हिंदी को सर्वभारतीयता का प्रतीक बनाना चाहते हैं । उसके लिए भाषायी भाईचारा पहले मज़बूत बने । उत्तर-दक्षिण का खुला संवाद इसका एक रास्ता है ।
यह कृति मलयालमभाषी हिंदी लेखक डॉ० आरसु की साहित्यिक तीर्थयात्रा का परिणाम है । इसके पीछे एक विराट लक्ष्य है । यह भाषायी समन्वय का कार्यक्षेत्र है । सुदूर दक्षिण के प्रांत केरल में रहकर कई साहित्यकारों ने अमर कृतियाँ लिखी हैं । उनकी कृतियां भी राष्ट्र भारती की संपदा हैं ।
तकषी शिवशंकर पिल्लै, एस०के० पोटटेक्काटट और एम०टी० वासुदेवन नायर को इस भाषा में कृतियां लिखकर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था । उनके समानधर्मी और भी कई कथाकार हैं ।
सृजन-क्षण की ऊर्जा, उन्मेष और उलझन पर उनके विचारों से अवगत होने के लिए अब हिंदी पाठकों को एक अवसर मिल रहा है । दक्षिण भारत की एक भाषा के साहित्यकारों के साक्षात्कार पहली बार एक अलग पुस्तक के रूप में हिंदी पाठकों को अब मिल रहे हैं ।
मलयालम के बीस कथाकारों के हृदय की नक्षत्रद्युति यहाँ हिंदी पाठकों को मिलेगी । कुछ विचारबिंदु वे अवश्य आत्मसात् भी कर सकेंगे। हिंदी भेंटवार्ता के शताब्दी प्रसंग में प्रकाशित यह कृति एक कीर्तिमान है । इस कृति के माध्यम से मलयालम और हिंदी हाथ मिलाती हैं । दक्षिण के हृदय को उत्तर समझ रहा है । यह सांस्कृतिक साहित्यिक समन्वय की एक फुलझड़ी है ।

Dr. Arsu

डॉ० आरसु 
(कलमी नाम : आरसु)
जन्म : 1950, कालिकट 
मातृभाषा : मलयालम 
शिक्षा : हिंदी में एम० ए० पी-एच० डी० कालिकट विश्वविद्यालय से। पत्रकारिता और अनुवाद से डिप्लोमा ।
शेष विषय : स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास पर विदेशी संस्कृति और चिंतन का प्रभाव ।
अध्यापन : 1977 से 1984 तक गवर्नमेंट कॉलेज, कालिकट में 1985 से कालिकट विश्वविद्यालय में, 2008-2010 में आचार्य और अध्यक्ष, 2011 में सेवानिवृत्त ।
कृतियों : हिंदी और मलयालम में तीस कृतियाँ प्रकाशित ।
प्रमुख हिंदी कृतियाँ : 'स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास', ‘साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना', 'मलयालम साहित्य : परख और पहचान', 'अनुवाद : अनुभव और अवदान', 'हिंदी  साहित्य : सरोकार और साक्षात्कार', 'भारतीय भाषाओं के पुरस्कृत साहित्यकार', 'मलयालम के महान कथाकार', 'भारतीय साहित्य और आस्था' ।
पुरस्कार-प्रशस्तियां : ओइस्का इंटरनेशनल, जापान का पुरस्कार (1993), भारत सरकार का पुरस्कार (1997), बिहार सरकार का पुरस्कार (2003), उत्तर भारत की 10 साहित्यिक संस्थाओं के पुरस्कार, हरिवंश राय बच्वन पत्रकारिता पुरस्कार । सौहार्द सम्मान (उ० प्र०) (2009), केरल हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार (2010)।
अतिधि संपादक : अनुवाद मधुमति, सद्भावना दर्पण, अंतरंग, छत्तीसगढ़ टुडे, युगस्पंदन, वर्तमान जनगाथा, नवनिकप के मलयालम विशेषांकों के अतिधि संपादक ।
विशेष व्याख्यान : जापान के तीन विश्वविद्यालयों में भारतीय साहित्य पर व्याख्यान (2002), उत्तर भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में अनुवाद, भारतीय साहित्य और साहित्यिक  पत्रकारिता पर व्याख्यान ।

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