Chulbuli Kavitayen

Nisha Bhargva

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Suhani Books

  • ISBN No: 978-93-80631-58-5

हास्य मानव का नैसर्गिक गुण है। समाज में जीवन के लिए हास्य की उपादेयता अपरिमित है। वर्तमान समय के तनावों, कुंठाओं और संत्रासों के बीच थके आदमी के लिए, हास्य राहत की मीठी सी मुस्कान के रूप में हमेशा अपनी अस्मिता और जिंदादिली के साथ बना रहता है। हास्य-व्यंग्य साहित्य इसमें अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिसे पढ़कर पाठक नई ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
विदुषी निशा भार्गव हिंदी हास्य-व्यंग्य जगत की जानी-मानी सुपरिचित सशक्त रचनाकार है। इनकी हास्य कविताएं, जन सामान्य के परिवेश और अनुभवों से संपृक्त रचनाएं है। यों तो प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में दिन-प्रतिदिन कोई न कोई ऐसी दो-चार घटनाएं अथवा दुर्घटनाएं अवश्य की घट जाती हैं जो उसे ठहाका मारने पर विवश कर देती हैं। निशा भार्गव ने ऐसी घटनाओं को ही केन्द्र में रखकर हास्य व्यंग्य का साम्राज्य खड़ा कर दिया है जिन्हें पढ़कर पाठक सहज ही ठहाका लगाने को प्रेरित हो सकेंगें। भाषा की सहजता और शैली की प्रांजलता, निशा भार्गव की कविताओं की अन्यतम विशेषता है।
एक प्रबुद्ध महिला होते हुए भी कवयित्री ने महिलाओं को केन्द्र में रखकर भी अनेक हास्य व्यंग्य रचनाओं की प्रस्तुति की है। भले ही महिलाएं इससे तिलमिला जाएं, यही तो एक स्वस्थ हास्य की पहचान है और मानक भी है।
इस संग्रह की सभी रचनाओं को पाठक एक बार में ही पढ़कर आनन्द ले सकता है और तनावमुक्त होकर ‘फ्रेश’ अनुभव कर सकता है। सभी रचनाएं सरलता और सहजता से परिपूर्ण है इनमें कोई रूकावट या टकराहट जैसी समस्या नहीं आ सकती। सामाजिक विसंगतियों, विरोधाभासों और विद्रूपताओं पर प्रहार करती ये रचनाएं हास्य से भरपूर हैं। व्यंग्य से अधिक हास्य इन रचनाओं में प्रभावी है। आज के तनावग्रस्त मनुष्य के लिए ये रचनाएं एक प्रकार से ‘टाॅनिक’ का ही काम करती है। ये ‘चुलबुली कविताएं’ अपने नाम के अनुरूप ही अनूठी है और ‘चुलबुलेपन’ से भरपूर है। इन गुदगुदाने वाली रचनाओं के सृजन के लिए कवयित्री को हार्दिक बधाई। इस कृति की सभी रचनाएं हास्य बोध की उत्प्रेरक है। यह कृति सर्वसाधारण के लिए उपयोगी है। इन रचनाओं को पढ़कर पाठक निश्चय ही तनावमुक्त होकर, स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा ले सकेंगे। कवयित्री का श्रम सार्थक एवं सफल है। 
डाॅ. हरिसिंह पाल

Nisha Bhargva

अजमेर (राजस्थान) में पली बढी निशा भार्गव ने अर्थशास्त्र में एस.ए. किया । राजस्थान विश्वविद्यालय से स्वर्णपदक जीत कर अपने विद्यालय व महाविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ छात्रा कहलाने का गौरव प्राप्त किया । अपने महाविद्यालय से स्वर्ण एवं रजतपदक प्राप्त किये तथा आठ वर्षों तक राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्राप्त की ।
भूतपूर्व प्राध्यापिका एवं सदैव प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाली निशा भार्गव ने अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। विविध मंचों पर काव्यपाठ के साथ-साथ निशा भार्गव ने 1996 में राष्ट्रपति पवन में भी काव्यपाठ किया तथा भारत की प्रथम महिला श्रीमती विमला रगर्मा द्वारा सम्मानित हुई ।
'अनकहे पल' आपका सम्मिलित काव्य संग्रह है । 'उधार की मुस्कान' (2000), 'अच्छे फंसे' ( 2003) , 'चिकने घडे' (2006), 'बंटाधार' (2010) , 'घनचक्कर' (2012) हास्य व्यंग्य काव्य संग्रह हैं । 'तिनके-तिनके' (लघु कथा संग्रह) 2012 तथा 'बसंत बयार' 2012 (कहानी संग्रह) प्रस्तुत है। 
कल्पतरु संस्था दिल्ली द्वारा 1999 में 'कविता विदुषी' पुरस्कार मक्खनलाल शांतिदेवी ट्रस्ट द्वारा 2002 में हास्य-व्यंग्य लेखन हेतु सम्मानित , भारतीय साहित्यकार संसद बिहार द्वारा 2005 में 'हरिशंकर परसाई राष्ट्रीय शिखर साहित्य सम्मान', अखिल भारतीय राष्ट्रभाषा विकास संगठन एवं यू.एस.एम. पत्रिका गाजियाबाद द्वारा 2006 में सुभद्रा कुमारी चौहान स्मृति सम्मान, महिला मंगल संस्था दिल्ली द्वारा 'साहित्य प्रतिभा सामान' 2006, भारतीय साहित्यकार संसद बिहार द्वारा 2007 में काका हाथरसी साहित्य सम्मान, कवितायन संस्था द्वारा 'साहित्य सृजन सम्मान' 2011 प्राप्त हुए।
आकाशवाणी व दूरदर्शन के विविध कार्यक्रमों से लगातार जुडाव । कविता, कहानी, वार्ता, समीक्षा तथा साक्षात्कार का प्रसारण । टेलीविजन के 'वाह-वाह" कार्यक्रम (SAB), 'अर्ज किया है' (NDTV), "उठो जागो’ (प्रज्ञा टीवी) तथा दूरदर्शन की काव्यगोष्टियो में काव्य पाठ करने का अवसर मिला

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