Kaaveri Se Saagar Tak

P.S. Ramanunj

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  • Year: 2003

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Bhartiya Prakashan Sansthan

  • ISBN No: 9788188122349

कावेरी से सागर तक
श्री रामानुज की कविता, कविता होने की शर्त पर, संपूर्णतया सामाजिक है और कवि के निजत्व की रक्षा करती हुई भी अपने समय के समाज की चिंता को अभिव्यक्त करती हैं । निजत्व उनकी गहन अनुभूति या कुशल अभिव्यक्ति का है और समाज की चिंता मूल्यहीनता तथा आडंवर को लेकर है। ये कविताएं शोषक और शोषित, सामंतवाद और पूँजीवाद, आभिजात्य और निम्नवर्ग के बँटवारे की कविताएँ नहीं  हैं; ये मनुष्य, उसके परिवेश, उसकी बदली हुई मनोवृति और तत्परिणामी संवेदनहीनता की चिंता की कविताएँ हैं। पुराकथा, प्रचीन संस्कृति और इतिहास से शक्ति ग्रहण करती हैं और भारतीय संस्कृति तथा काव्य-परंपरा से हैं, पर अतीतजीवी, कल्पनाजीवी और पलायनवादी न होकर वर्तमान से सीधे साक्षात्कार करती हैं । जाति-वर्ग और प्रदेश को लांघकर भारतीय परिवेश का प्रतिविंवित करती हैं, अत: सच्चे अर्थ में भारतीय हैं । किसी भी धर्म-संप्रदाय के पक्ष या विपक्ष में खडी नहीं होतीं, बल्कि सीधे मानवीय धर्म को प्रकाशित करती हैं, इसलिए तत्त्वत: धर्म-निरपेक्ष  । संयत छोर शालीन है, अतएव अभिजात है ।

P.S. Ramanunj

डॉ० पी०एस० रामानुजं 
आई०पी०एस०, एम०ए०, पी-एच०डी०, डी० लिट्० (संस्कृत)
प्रवृति : बसे, कथाकार, निबंधकार, नाटककार, संस्मरणकार, आलोचक, संशोधक एवं संगीतकार 
अब तक 28 रचनाएँ कन्नड़ में प्रकाशित तीन रचनाएँ हिंदी में प्रकाशित
पुरस्कार : 'रुचिर' काव्य-संग्रह के लिए मुद्दण साहित्यिक पुरस्कार 
पुलिस विभाग में राष्ट्रपति प्रशंसनीय सेवा-पदक (1995)
'कोडवरु' शोध-आलोचना तथा 'बिल्ली की भाषा तथा अन्य निबंध' नामक निबंध-संग्रह के लिए राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार

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