Hindustan Ki Diary

Dirgha Narayan

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  • Year: 2019

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788194004028

'हिंदुस्तान की डायरी' में दीर्घ नारायण के कहानीकार का वह रूप सहज ही नजर आ जाता है जिसमें वह कहानी को अपने समय, समाज व बदलती संस्कृति की धड़कन बना देना चाहते हैं। यहाँ अनुभव जिंदगी से निकलकर चौदह कहानियों में इस तरह प्रविष्ट हो गए हैं कि विविध पक्षीय संबंधों-मूल्यों पर संजीदगी से विचार होता चलता है। वर्तमान को तो ये कहानियाँ गहराई से अंकित करती ही हैं, एक गंभीर व सकारात्मक भविष्य-दृष्टि भी सृजित करती हैं जिससे हमारे समाज को संचालित करने वाली शक्तियाँ सचेत हो सकेंगी। लेखक की यह एक वाजिब चिंता है कि भारत का हर नागरिक तो पाकिस्तान में अमन-चैन व तरक्की ही चाहता है किंतु दुर्भाग्य यह है कि पाकिस्तान की नजर में सबसे बड़ा शत्रु भारत बना हुआ है। भारत की ओर से दरअसल यह एक ईमानदार डायरी है जिससे दोनों ओर के हुक्मरानों को सही दिशा मिल सकती है। अपने यथार्थ में एक मुख्य अधिशासी अधिकारी की ये कहानियाँ बदलते समय में उन दस्तकों की शिनाख्त हैं। जो परिवार, शहर, देश और समाज के दरवाजों पर सुनाई पड़ रही हैं। यहाँ भाषा ऐसी दोस्ताना है कि कथा के पात्रों और स्थितियों का मूल भाव बड़ी सहजता से संप्रेषित हो जाता है। रूपवादी लटकों-झटकों से संघर्ष कर रही आज की हिंदी कहानी के लिए दीर्घ नारायण जी की ये कहानियाँ एक सार्थक मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं क्योंकि यहाँ हर कहानी एक नया कथ्य खोजकर लाती है और यथार्थ से सीधी मुठभेड़ करती है 

Dirgha Narayan

डॉ. दीर्घ नारायण
जन्म : 1968, गाँव बकैनियाँ, अररिया । पूर्णिया (बिहार)
शिक्षा : जिला स्कूल पूर्णियाँ, बी. ए. (भागलपुर विश्वविद्यालय) ऑनर्स (मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा) एम. ए. इतिहास (मंडल विश्वविद्यालय,
मधेपुरा) एम. ए. हिंदी (इग्नू) पी-एच. डी. (राँची विश्वविद्यालय) भारतीय रक्षा संपदा सेवा, ग्रुप ए।
(सिविल सेवा, 1997 बैच) में अधिकारी

प्रकाशित कहानियाँ : पिछले 8 वर्षों में लगभग 33 कहानियाँ 'हंस', 'कथादेश', 'पाखी', 'कथाक्रम' ‘समकालीन भारतीय साहित्य', 'वाक', 'परिकथा'। * अकार' 'साहित्य अमृत', 'आधारशिला', 'लमही' । “बयां' ‘वर्तमान साहित्य', 'सोच विचार', 'संवदिया' व सांवली' में प्रकाशित। दो कहानी संग्रह 'पहला रिश्ता' व 'क्रांति की मौत' प्रकाशित ।
पुरस्कार : जनरल ऑफिस चीफ अवार्ड से तीन बार सम्मानित (2006, 2013 एवं 2015), उत्कृष्ट प्रशासन हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए वर्ष 2009 एवं 2011 में नामित
संप्रति : सेवा व लेखन

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