Piya Peer Na Jaani

Malti Joshi

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  • Year: 2018

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9788188121151

पिया पीर न जानी
इक्कीसवीं सदी के मुहाने पर खडे होकर, स्वाधीनना की पचासवीं वर्षगाँठ मनाते हुए भी यह निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता कि भारतीय नारी पूर्णरूपेण स्वतंत्र है ।
परम्यरा की, रूढियों की, सनातन संस्कारों को अर्गलाएँ आज भी उसके पाँवों को घेरे हुए है । आर्थिक स्वातंत्र्य का झाँसा देकर उसे अर्थार्जन में भी झोंक दिया गया है । अब वह घर और बाहर दोनों तरफ पिसती है--दो-दो हुक्मरानों के आदेशों पर नाचती है । इस मायने में वह सोलहवीं सदी की नारी से भी जादा शोषित और असहाय हो गई है ।
पर हाँ, इधर कुछ वर्षो में छटपटाने लायक ऊर्जा उसने अपने में भर ली है । इसीलिए कभी-कभी इन बंधनों को तोड़ने में भी वह सफल हो जाती है ।


Malti Joshi

मालती जोशी

जन्म :  4 जून, 1934
शिक्षा : एम०ए० हिंदी, आगरा विश्वविद्यालय।

लगभग 35 पुस्तकें प्रकाशित, जिनमें दो मराठी कथा-संग्रह, दो उपन्यास, पाँच बाल-कथाएँ, एक गीत-संग्रह और शेष कथा-संग्रह सम्मिलित
हिंदी की लगभग सभी लब्धप्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां एवं लघु उपन्यास प्रकाशित। करीब दो दर्जन कहानियों के रेडियो नाट्य रूपांतर दूरदर्शन पर कई कहानियों के नाट्य रूपांतर। जया बच्चन द्वारा सात कहानियों पर 'सात फेरे' सीरियल गुलजार द्वारा निर्देशित सीरियल 'किरदार' में दो कहानियों का समावेश। 'भावना' सीरियल में तीन कहानियों का प्रस्तुतिकरण।
अहिन्दीभाषी कथा-लेखिका के रूप में शिवसेवक तिवारी पदक, रचना पुरस्कार, कलकता 1983, मराठी कथा-संग्रह ‘पाषाया' के लिए महाराष्ट्र शासन का पुरस्कार सन् 1984, अक्षर आदित्य सम्मान, कला मंदिर सम्मान, मधुवन गुरुवंदना सम्मान, महिला वर्ष में स्टेट बैंक ऑफ इंदौर सम्मान, म०प्र० के राज्यपाल द्वारा अहिंदीभाषी लेखिका के रूप में सम्मान (1985), म०प्र० हिंदी साहित्य सम्मेलन के 'भवभूति' अलंकरण से वर्ष 1998 में विभूषित । 

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