Narak Dar Narak

Mamta Kalia

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
200.00 180 + Free Shipping


  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788189859091

इस उपन्यास पर सबसे पहले मुझे अपने प्रिय रचनाकार यशपाल जी का पत्र मिला तो में कई दिनों तक रोमांचित रही। इस महान उपन्यासकार ने मेरे जैसी नई लेखिका की पुस्तक  सिर्फ पढ़ी, वरन उस पर पत्र लिखकर अपनीसराहना व्यक्त की, इस गर्व और सुख का बयान मैं शब्दों में नहीं कर सकती। यशपाल जी का पत्र मैंने प्रमाण-पत्र की तरह पिछले तीस वर्षों से सँभालकर रखा हुआ है। जब कभी लिखने का विश्वास डगमगाने लगता हैयह पत्रध्रुव तारे की तरह मुझे रास्ता दिखाता है। यशपाल जी के ही शब्दों में : ‘उपन्यास की भाषा संक्रमण काल के उफनते-खलबलाते जीवन की संवेदनाओं की अभिव्यक्ति के अनुरूप सरल-ओजस्वी लगी। विशेषकर उषा या माँ की सामाजिकता और आवरणरहित स्वाभाविकता। कथानक और उसके अनुषंग मर्मस्पर्श के साथ नए जीवन-संतुलन की चेतना को भी कुरेदते हैं।

'नरक दर नरक नाम की चोट चौंकाकर ध्यान खींचती है, परंतु पाठक की यात्रा सहारा के नरक की वीरानगियों में दम छूट जाने से पहले ही बागे-अदन की संजीवनी वायु का आभास महसूसती जान पड़ती है। नरक दर नरक से घोर बचाव की आशा जगने लगती है। सफल रचना के लिए बधाई।' -यशपाल

Mamta Kalia

ममता कालिया जन्म : 2 नवंबर, 1940, मथुरा, उ०प्र० शिक्षा : एम०ए० (अंग्रेजी साहित्य), दिल्ली विश्वविद्यालय पूर्व सेवा : प्राचार्या, महिला सेवा सदन डिग्री कॉलेज, इलाहाबाद से सेवानिवृत ० प्रवक्ता, अंग्रेजी विभाग, एस०एन०डी०टी० महिला विश्वविद्यालय, मुंबई ० प्रवक्ता (अंग्रेजी), दौलतराम कॉलिज, दिल्ली विश्वविद्यालय संप्रति : निदेशक, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : 'छुटकारा', 'एक अदद औरत', 'सीट नंबर छह', 'उसका यौवन', 'प्रतिदिन', 'चर्चित कहानियाँ', 'जाँच अभी जारी है', 'बोलने वाली औरत', 'मुखौटा', 'निर्मोही', 'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' (कहानी-संग्रह) ० 'बेघर', 'नरक दर नरक', 'प्रेम कहानी', 'लड़कियाँ', 'मानवता के बंधन', (सोमरसेट मॉम के उपन्यास का अनुवाद), 'एक पत्नी के नोट्स', 'दौड़' (उपन्यास) ० 'खाँटी घरेलू औरत' (कविता-संग्रह) ० 'आत्मा अठन्नी का नाम है', 'आप न बदलेंगे' (एकांकी-संग्रह) संपादित पुस्तकें : 'एक कदम आगे' (राजस्थान शासन के लिए कहानी-संकलन का संपादन) ० 'वर्ष अमरकान्त' (साहित्यिक आलोचना पर केंद्रित ग्रंथ) ० 'गली-कूचे' (रवीन्द्र कालिया की कहानियों का संकलन) ० 'पाँच नए एकांकी' (एकांकी संकलन) ० 'टिन एजर' पत्रिका के कविता पृष्ठ का पाँच वर्ष तक संपादन ० 'नयी सदी की पहचान प्रमुख महिला कहानीकार' (कहानी-संकलन) सम्मान एवं पुरस्कार : सर्वश्रेष्ठ कहानी पुरस्कार, सरस्वती प्रेस, इलाहाबाद, 1976 ० उ०प्र० हिंदी संस्थान का यशपाल सम्मान, 1985 ० रचना सम्मान, अभिनव भारती, कोलकाता, 1990 ० उ०प्र० हिंदी संस्थान का महादेवी वर्मा अनुशंसा सम्मान, 1998 ० सावित्री बाई फुले सम्मान, 1999 ० उ०प्र० हिंदी संस्थान का साहित्य-भूषण सम्मान, 2002

Scroll