Mahayogi Gorakhnath : Sahitya Aur Darshan

Govind Rajnish

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-934328-0-8

महायोगी गोरखनाथ: साहित्य और दर्शन एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। प्रस्तुति प्रो. गोविंद रजनीश की है, जिन्होंने इसका संपादन भी किया है। प्रो. रजनीश गूढ़-गंभीर विषयों को सुगम रूप में व्यक्त-व्याख्यायित करने के लिए जाने जाते हैं। इस पुस्तक में उन्होंने भारतीय संस्कृति के सर्वश्रेष्ठ मनीषियों में से एक परमयोगी गोरखनाथ के निगूढ़ साहित्य और उसमें निहित दर्शन को संयोजित किया है। गोरखबानी के साथ उसका गद्यार्थ होने से पाठकों के लिए यह सामग्री कई दृष्टियों से पठनीय और संग्रहणीय बन पड़ी है।
प्रो. रजनीश ने ‘भूमिका के दो अध्याय’ के अंतर्गत गोरखनाथ के व्यक्तित्व और उनकी गुरु परंपरा पर विस्तार से लिखा है। एक व्यक्ति के रूप में योगी गोरखनाथ के जन्म-जाति आदि पर यह प्रामाणिक सामग्री है। प्रो. रजनीश ने आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के ये वाक्य उद्ध्ृत किए हैं, ‘गोरखनाथ अपने युग के सबसे बड़े धर्मता थे।...उनका चरित्रा स्पफटिक के समान उज्ज्वल, बुद्धि भावावेश से एकदम अनाविल और कुशाग्र तीव्र थी।’ अध्याय 2 में ‘नाथ और सिद्ध’ शीर्षक से इन महान् परंपराओं का संक्षिप्त वर्णन किया गया है। साथ ही उस आभावलय को भी प्रकट किया गया जिसमें गोरखनाथ की अजेय अस्मिता चमकती है। प्रो. रजनीश के शब्दों में, ‘गोरखनाथ का काव्य दुरूह होकर भी उनके संबंध् में असंख्य दंतकथाओं, लोककथाओं और प्रवादों का जुड़ जाना उनके प्रखर और प्रभावी व्यक्तित्व का परिचायक है।’
साखी (सबदी) और पद के अंतर्गत गोरखबानी को प्रस्तुत किया गया है। मूल के साथ सरल अर्थ भी है, जो पाठक के लिए उपयोगी है। गोरखनाथ के जीवन दर्शन को समझने के लिए इसका पाठ नितांत आवश्यक है। अनेक विद्वानों ने कबीर आदि परवर्ती संतों पर गोरखनाथ के प्रभाव का उल्लेख किया है, जो सर्वथा उचित है। 

Govind Rajnish

डॉ० गोविन्द रजनीश
जन्म : 10 सितंबर, 1938 को राजस्थान के वैर कसी में 
शिक्षा : राजस्थान विश्वविद्यालय से एम०ए० आगरा विश्वविद्यालय से पी-एच०डी० और डी०लिट्० सैंतीस वर्षों तक विश्वविद्यालयों में अध्यापन 1 जुलाई, 1999 को प्रोफेस-पद से सेवानिवृत्त इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के भाषा-सलाहकार तथा क० मुं० हिंदी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ के निदेशक रहे।  जाने-माने साहित्यकार । तीस पुस्तकें प्रकाशित । पत्र-पत्रिकाओं के लिए नियमित लेखन
प्रमुख रचनाएँ-
समकालीन हिंदी कविता की संवेदना', 'साहित्य का सामाजिक यथार्थ', 'पुनश्चितन', 'समसामयिक हिंदी कविता : विविध परिदृश्य', 'रांगेय राघव का रचना-संसार', 'नयी कविता : परिवेश, प्रवृत्ति और अभिव्यक्ति' (आलोचना) ० 'रहीम ग्रंथावली', 'सत्यनारायण ग्रंथावली', 'रैदास रचनावली', 'नामदेवर चनावली', 'पंचामृत और पंचरंग', 'बखना रचनावली', 'हिंदी की आदि और मध्यकालीन फागु कृतियां' (संपादन) ०  'लोक महाकाव्य : आल्हा', 'हरदौल लोकगाथा', 'राजस्थान के पूर्वी अंचल का लोकसाहित्य', 'ब्रज की लोकगाथाएँ' (लोकसाहित्य) ० साहित्य अकादेमी, दिल्ली द्वारा प्रकाशित 'इनसाइक्लोपीडिया आंफ इंडिया लिट्रेचर' के छह खंडों के लिए लेखन
सहस्राब्दी विश्व हिंदी सम्मेलन, केंद्र साकार, उ०प्र० सरकार, उ०प्र० हिंदी संस्थान, सत्यनारायण-स्मारक-समिति, आगरा विश्वविद्यालय तथा लोक परिषद से सम्मानित एवं पुरस्कृत ।

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