Sant Meeranbai Aur Unki Padaavali

Baldev Vanshi

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9788188121755

संत मीराँबाई और उनकी पदावली
मीराँबाई  की गति अपने मूल की ओर है । बीज-भाव की ओर है । भक्ति, निष्ठा, अभिव्यक्ति सभी स्तरों पर मीराँ ने अपने अस्तित्व को, मूल को अर्जित किया है। आत्मिक, परम आत्त्मिक उत्स (कृष्ण) से जुड़कर जीवन को उत्सव बनाने में वह धन्य हुई । अस्तित्व की गति, लय, छंद को उसने निर्बंध के मंच पर गाया है। जीया है ।
मीराँ उफनती आवेगी बरसाती नदी की भाँति वर्जनाओं की चटूटानें  राह बनाती अपने गंतव्य की ओर बे-रोक बढती चली गई । वर्जनाओं के टूटने की झंकार से मीराँ की कविता अपना श्रृंगार करती है। मीराँ हर स्तर पर लगातार वर्जनाओं को क्रम-क्रम तोड़ती चली गई । राजदरबार की, रनिवास की, सामंती मूल्यों की, पुरुष-प्रधान ममाज द्वारा थोपे गए नियमों की कितनी ही वर्जनाओं की श्रृंखलाएँ मीराँ ने तोड़ फेंकीं और मुक्त हो गई । इतना ही नहीं, तत्कालीन धर्म-संप्रदाय की वर्जनाओं को भी अस्वीकार कर दिया । तभी मीराँ, मीराँ बनी ।

Baldev Vanshi

डॉ० बलदेव वंशी
जन्म : 1 जून, 1938, मुलतान (अब पाकिस्तान में)
एम०ए० हिंदी, पी-एच०डी० । हिंदी के सुप्रतिष्ठित कवि, आलोचक, पत्रकार और संपादक । ग्यारह कविता-संग्रह, पाँच आलोचना पुस्तकें सहित पैंतीस से ऊपर पुस्तके प्रकाशित । विभिन्न भाषा अकादमियों, साहित्यिक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों द्वारा सम्मानित । छ: पुस्तकें केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा पुरस्कृत । 'कहत कबीर कबीर' पर 'कबीर शिखर सम्मान' प्राप्त । संत मलूकदास की मूल वाणी को देवनागरी में लाने के उपलक्ष्य में प्रथम श्री मलूक रत्न पुरस्कार (1999) । रचनाएँ विश्वविद्यालय पाठयक्रमों में निर्धारित क्या अनेक भाषाओं में अनूदित ।
'विश्व रामायण सम्मलेन' क्तथा कबीर चेतना यात्रा' के सिलसिले में मॉरीशस, हालैंड, इंग्लैंड, बैल्जियम, नेपाल आदि विदेशों में और देश में यात्राएँ । 'अखिल भारतीय भाषा संरक्षण संगठन' के संस्थापक अध्यक्ष, विश्व कबीरपंथी महासभा के अध्यक्ष, दादू शिखर सम्मान  समिति के संयोज़क-निदेशक ।
'कहत कबीर', 'दादू जीवन दर्शन', 'संत कवि  दादू', ‘श्री मलूक वाणी' (मूल रूप में प्रथमत: प्रकाश्य) पुस्तकों के लेखक-संपादक ।

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