Dharati Mata, Pita Aakash

Pushpa Sinha

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-89859-92-3

धरती माता, पिता आकाश
आज पर्यावरण प्रदूषण के कारण पर्यावरण असंतुलन हो रहा है। इससे न केवल जीवन प्रक्रिया बाधित हो रही है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक प्रगति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इतना ही नहीं अब पर्यावरण प्रदूषण के कारण प्राकृतिक आपदाओं की वृद्धि हो रही है, जिसके कारण प्रचुर मात्र में जन-धन की हानि हो रही है। भूमंडलीय ताप बढ़ रहा है, जिसके कारण हिमाच्छादित क्षेत्रों की काफी बर्फ पिघलने से भविष्य में समुद्रतल में वृद्धि होगी और महत्त्वपूर्ण तटीय क्षेत्र डूब जाएँगे। साथ ही पर्यावरण प्रदूषण से अब जलवायु परिवर्तन का खतरा मँडरा रहा है, जिसके कारण कई जीव विलुप्त हो जाएँगे और खाद्य संकट की आशंका भी जताई जा रही है। हो सकता है कि एक दिन भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण डाइनोसोरस की तरह पृथ्वी से मानव भी विलुप्त हो जाएँ।
अतः इस पुस्तक में पर्यावरण को बचाने के लिए विभिन्न उपाय सुझाए गए हैं, जिनको अपनाकर हम पर्यावरण को संतुलित कर सकते हैं और भयंकर संकट से हमारा बचाव हो सकता है।

Pushpa Sinha

पुष्पा सिन्हा
श्रीमती पुष्पा सिन्हा का जन्म 30 मार्च, 1953 को पटना में हुआ। इनका बचपन कोलकाता में बीता एवं अध्ययन भी कोलकाता में ही हुआ।
आपने विज्ञान, कानून, शिक्षा तथा मानवाधिकार विषयों पर कई उपाधियाँ प्राप्त कीं। दिल्ली में अध्यापन के दौरान आपमें बच्चों के प्रति गहरी रुचि जागी, जिसके परिणामस्वरूप आप बच्चों के अधिकारों पर ‘ह्यूमन राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ नामक पुस्तक लिखने के लिए प्रेरित हुईं। अब तक विभिन्न विषयों पर आपकी पंद्रह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। संप्रति आप स्वतंत्र लेखन के कार्य में संलग्न हैं।
आपको राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा मानव अधिकार विषयक हिंदी में लिखित मौलिक कृति ‘मानव अधिकार एवं महिलाएँ’ (महिलानामा) के लिए वर्ष 2006 में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आप ‘भारतीय लेखक समाज’ की सदस्या भी हैं।

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