Patra-Samvad : Ageya Aur Rameshchandra Shah

Krishna Dutt Paliwal

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789382114987

Krishna Dutt Paliwal

कृष्णदत्त पालीवाल 
4 मार्च, 1943 को सिकंदराबाद, ज़िला फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में जन्मे कृष्णदत्त पालीवाल प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, जापान के तोक्यो यूनिवर्सिटी आफ फारेन स्टडीज़ में विज़िटिंग प्रोफेसर रहे।
हिंदी के समकालीन बौद्धिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों में गहन अभिरुचि के साथ हिस्सेदारी।
प्रमुख प्रकाशन: भवानीप्रसाद मिश्र का काव्य-संसार ०  आचार्य रामचंद्र शुक्ल का चिंतन जगत् ०  मैथिलीशरण गुप्त: प्रासंगिकता के अंतःसूत्र ०  सुमित्रानंदन पंत ०  डा. अम्बेडकर और समाज-व्यवस्था ०  सीय राम मय सब जग जानी ०  सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ०  हिंदी आलोचना के नए वैचारिक सरोकार ०  गिरिजाकुमार माथुर ०  जापान में कुछ दिन ० उत्तर-आधुनिकतावाद की ओर ०  अज्ञेय होने का अर्थ ०  उत्तर- आधुनिकतावाद और दलित साहित्य ०  नवजागरण और महादेवी वर्मा का रचना-कर्म: स्त्री-विमर्श के स्वर ०  अज्ञेय: कवि-कर्म का संकट ०  निर्मल वर्मा ०  दलित साहित्य: बुनियादी सरोकार ०  निर्मल वर्मा: उत्तर औपनिवेशिक विमर्श ०  अज्ञेय से साक्षात्कार (संपादन) ०  अंतरंग साक्षात्कार (संपादन) ०  पत्र-संवाद: अज्ञेय और रमेशचंद्र शाह, पत्र-संवाद: अज्ञेय और नंदकिशोर आचार्य ०  किताबघर प्रकाशन से फरवरी 2015 में प्रकाशित अंतिम पुस्तक--आधुनिक भारतीय नयी कविता।
संपादन: लक्ष्मीकांत वर्मा की चुनी हुई रचनाएं ०  मैथिलीशरण गुप्त रचनावली--बारह खंडों में, अज्ञेय रचनावली--अठारह खंडों में।
पुरस्कार/सम्मान: हिंदी अकादमी पुरस्कार ०  दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन सम्मान ०  तोक्यो विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय, जापान द्वारा प्रशस्ति पत्र ०  उ० प्र०  हिंदी संस्थान का राममनोहर लोहिया अतिविशिष्ट सम्मान ०  सुब्रह्मण्यम भारती सम्मान, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा ०  साहित्यकार सम्मान, हिंदी अकादमी, दिल्ली ०  हिंदी भाषा एवं साहित्य में बहुमूल्य योगदान के लिए विश्व हिंदी सम्मान, आठवां विश्व हिंदी सम्मेलन, न्यूयार्क, अमेरिका में सम्मानित।

स्मृति शेष: 8 फरवरी, 2015

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