Vishwa Vigyan Kathayen : Science In Twentieth Century : An Encyclopedia-3

Shuk Deo Prasad

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-89859-39-8

विज्ञान कथाओं को कथा की एक विधा के रूप में मान्यता मिले, ह्यूगो गन्र्सबैक ने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई और उन्होंने ही इसे ‘साइंटीफिक्शन’ नाम से अभिहित किए जाने का परामर्श दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने इस विधा को अपनी तरह से परिभाषित भी किया। ‘अमेजिंग स्टोरीज’ के प्रथमांक में संपादकीय टिप्पणी में गन्र्सबैक ने लिखा-‘साइंटीफिक्शन’ से मेरा अभिप्राय जूल्स वर्न, एच.जी. वेलस और एडगर एलन पो द्वारा लिखी गई ऐसी कहानियों से है, जिसमें आकर्षक रोमांच के साथ वैज्ञानिक तथ्य और युगद्रष्टा की दूरदर्शिता का सम्मिश्रण हो। ....आज विज्ञान कथा-साहित्य में चित्रित किए गए किसी आविष्कार के कल सत्य हो जाने में असंभव जैसा कुछ नहीं है।’
गन्र्सबैक की इसी परिभाषा के कारण विज्ञान-गल्पों को ‘भविष्यद्रष्टा साहित्य’ भी कहा जाने लगा और लेखकों से ऐसी अपेक्षाएं की जाने लगीं जो निंतात अव्यावहारिक थीं।
तो क्या विज्ञान कथाओं में आज के कल्पित आविष्कार कल के सच हैं? जी नहीं! ऐसा कदापि नहीं हो सकता। किसी भी गल्प में परिकल्पित कोई भी आविष्कार तदनुरूप कभी भी साकार नहीं हुआ। ऐसे सारे दावे मिथ्या हैं। हां, आविष्कारकों ने विज्ञान-गल्पों से प्रेरणाएं अवश्य ली हैं, इसकी स्वीकारोक्तियां हैं।
ऐसा इसलिए असंभव है कि गल्पकार आविष्कारक नहीं है और आविष्कारक की गल्प-लेखन में मति-गति नहीं है। विज्ञान-गल्प-लेखन एक विरल विधा है, जिसमें विज्ञानसिद्धि और रससिद्धि दोनों वांछनीय हैं। और ऐसा संयोग विरल ही है।

Shuk Deo Prasad

शुकदेव प्रसाद
जन्म: 24 अक्तूबर, 1954 को बस्ती जिले (अब सिद्धार्थ नगर) के एक शिक्षक परिवार में।
शिक्षा: प्रारंभिक शिक्षा गृह जनपद में तथा उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में। एम.एस-सी. (वनस्पति विज्ञान), एम.ए. (हिंदी), एम.ए. (अर्थशास्त्र) तथा एम.ए. (प्राचीन भारतीय इतिहास), साहित्य महोपाध्याय (मानद डाक्टरेट)।
लेखन/संपादन: हिंदी विज्ञान लेखन में प्रारंभ से रुचि। अब तक देश की विभिन्न पत्रा-पत्रिकाओं में विज्ञान- संबंधी 4000 से अधिक लेखों एवं शताधिक पुस्तकों का प्रणयन। ‘विज्ञान भारती’, ‘विज्ञान वैचारिकी’ एवं ‘पर्यावरण दर्शन’ पत्रिकाओं का कुशल संपादन।
पुरस्कार: उत्कृष्ट लेखन के लिए--साइंटिस्ट आफ टुमारो एवार्ड, उ.प्र. हिंदी संस्थान पुरस्कार, विक्रम साराभाई पुरस्कार, राष्ट्रीय बाल साहित्य पुरस्कार, डा. होमी भाभा पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी पुरस्कार, कौटिल्य पुरस्कार, साहित्य महोपाध्याय (डाक्टरेट की मानद उपाधि हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग, 1990), जगपति चतुर्वेदी बाल विज्ञान लेखन सम्मान, चमेली देवी महेन्द्र स्मृति पुरस्कार, राजभाषा पुरस्कार, डा. आत्माराम पुरस्कार, डा. संपूर्णानंद पुरस्कार, अनुशंसा पुरस्कार, विज्ञान वाचस्पति, सर्जना पुरस्कार, अवध भूषण, भारतीय साहित्य सुधा-रत्न, राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान पुरस्कार तथा डा. सी.वी. रमन तकनीकी लेखन पुरस्कार।
संप्रति: शुकदेव प्रसाद शांति एवं विज्ञान प्रतिष्ठान, इलाहाबाद के अध्यक्ष/स्वच्छंद विज्ञान लेखक। ‘शुकदेव प्रसाद आन करंट साइंस’ के संपादक।

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