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mere saakshatkaar series

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  • Mere Saakshatkaar : Shyam Singh Shashi
    Shyam Singh Shashi
    300 240

    Item Code: #KGP-581

    Availability: In stock


  • Mere Saakshaatkaar : Malti Joshi
    Malti Joshi
    180

    Item Code: #KGP-1298

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Ramnika Gupta
    Ramnika Gupta
    240 216

    Item Code: #KGP-623

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Ram Vilas Sharma
    Ram Vilas Sharma
    450 360

    Item Code: #KGP-712

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Ramdarash Mishra
    Ramdarash Mishra
    275 234

    Item Code: #KGP-217

    Availability: In stock


  • Mere Saakshaatkaar : Mannu Bhandari
    Mannu Bhandari
    350 280

    Item Code: #KGP-678

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Mridula Garg
    Mridula Garg
    225 203

    Item Code: #KGP-870

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Mohan Rakesh
    Mohan Rakesh
    225 203

    Item Code: #KGP-841

    Availability: In stock


  • Mere Saakshaatkaar : Shrilal Shukla
    Shree Lal Shukla
    190

    Item Code: #KGP-173

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Bhawani Prasad Mishra
    Bhawani Prasad Mishra
    280 238

    Item Code: #KGP-413

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Maitreyi Pushpa
    Maitreyi Pushpa
    275 234

    Item Code: #KGP-312

    Availability: In stock

    मेरे साक्षात्कार : मैत्रेयी पुष्पा

    मैत्रेयी पुष्पा हिंदी की विशिष्ट लेखिका हैं। ऐसी विशिष्टजिन्होंने स्त्री-जीवन के सामान्य सुख-दुःख को अपनी रचना के केंद्र में स्थान दिया है। मैत्रेयी को यह श्रेय भी है कि आदि-इत्यादिकी कोटि से स्त्री-प्रश्नों को उन्होंने बाहर निकाला है। समकालीन साहित्य और समाज में मैत्रेयी पुष्पा का रचनात्मक स्वर निरंतर सार्थकता प्राप्त कर रहा है। मेरेसाक्षात्कारमें मैत्रेयी पुष्पा से समय-समय पर लेखकों/पत्रकारों द्वारा की गई बातचीत संकलित है। साक्षात्कारों से गुजरते हुए स्पष्ट लगता है कि प्रश्न तो एक निमित्त या प्रस्थानहैं। लेखिका के मन में इतना कुछ उमड़-घुमड़ रहा है कि वह बात प्रारंभ करने का बहाना भर चाहता है। कहानीउपन्यास और अन्य टिप्पणियों में जो अनकहा रह गयावह इनसाक्षात्कारों में प्रकट हुआ है। मैत्रेयी की पारदर्शी भाषाबेलाग सोच और जोखिम उठाने की प्रवृत्ति इन साक्षात्कारों को पठनीय  विचारणीय बनाती है। स्त्री-विमर्शतथा विभिन्नप्रश्नों के उत्तर तलाशते ये साक्षात्कार मूल्यवान हैं।

    इस पुस्तक में मैत्रेयी पुष्पा के कुछ विशेष वक्तव्य भी उपस्थित हैं। ये वक्तव्य विभिन्न संदर्भों के साथ हैं। इनसे जाहिर होता है कि मैत्रेयी अपने परिवेश और उसकी सक्रियताओंसे भली-भाँति परिचित हैं। वक्तव्य वस्तुतः लेखिका की वैचारिकता को पहचानने का माध्यम हैं। साक्षात्कारों और पूरक रूप में वक्तव्यों से समृद्ध यह पुस्तक इस जटिल समयको समझने में हमारी मदद करती है।

  • Mere Saakshatkaar : Devendra Satyarthi
    Davendra Satyarthi
    200

    Item Code: #KGP-548

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Manager Pandey
    Manager Pandey
    125

    Item Code: #KGP-541

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Nagarjun
    Nagaarjun
    300 249

    Item Code: #KGP-15

    Availability: In stock


  • Mere Saakshaatkaar : Kunwar Narain
    Kunwar Narayan
    235 212

    Item Code: #KGP-9049

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Bhishm Sahni
    Bhishm Sahni
    250 225

    Item Code: #KGP-861

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Nemi Chandra Jain
    Nemichandra Jain
    150

    Item Code: #KGP-2088

    Availability: In stock

    मेरे सक्षात्कार : नेमिचन्द्र जैन
    'मेरे साक्षात्कार' श्रृंखला में वरिष्ट कवि, आलोचक और नाट्य चिंतक नैमिचन्द्र जैन की पुस्तक का महत्व इस बात में निहित है कि इसमें नैमिजी के व्यक्तित्व और कृतित्व के उन पक्षों पर प्रकाश पड़ता है जो प्रायः अलक्षित रहे हैं । नैमिजी हिंदी की सबसे बुजुर्ग पीढी में आते है और उन्होंने पिछले साठ-पैंसठ वर्षों  के साहित्यिक आंदोलनों, सांस्कृतिक परिवर्तनों और सामाजिक उथल-पुथल के न केवल करीब से देखा है वरन उसको जिया भी है; इसलिए यहाँ दिखाई देगा कि जिन प्रश्नों पर हम आज भी बात करने से कतराते रहे है, उनका सामना वे बहुत पहले कर चुके है । चाहे इप्टा के गठन का कल हो या बंगाल के अकाल का प्रश्न, चाहे तारसप्तक के प्रकाशन या संपादन का विवाद हो या ठप्पेदार आलोचना पर प्रहार, चाहे नाटयालोचन में फैले धुँधलके का प्रश्न  हो, चाहे व्यापक सांस्कृतिक विमर्श का-नैमिजी सब पर बात करते है और इस अनौपचारिकता के साथ कि उनका कहा गया एक-एक वाक्य सबक बनता जाता है । नैमिजी  अपने कृतित्व में जितने बेलाग है, उतने ही अपने व्यक्तित्व में भी खुले हुए । आप चाहें तो उनको साफ-साफ देख सकते है । अपने परिवार, उसकी समस्याएँ, स्वयं का संघर्ष और-समग्रता में हमारे समाज के एक-एक रहस्य को खेलते नैमिजी रचना और व्यक्ति के उस भेद को खोल देते है कि दोनों में कहीं कोई गुत्थी  न है और न होनी चहिए ।
    साहित्य, रंगकर्म, संस्कृति के अनेक असुविधाजनक प्रश्नों सहित व्यापक वैचारिक विमर्शों  के माध्यम से नैमिजी ने जो स्थापनाएँ की है वे शब्द के लिए उतनी ही महत्त्वपूर्ण है जितनी कर्म के लिए । जीवन के अनेक अनुभव यहाँ मानो एक ऐसा जल-स्रोत बन गए है जो हर मौसम में शीतलता देता है । साक्षात्कार अनौपचारिक और पूर्णतया संवाद की शैली में है, इसलिए पुस्तक से गुज़रते हुए पायेंगे कि आप भी इस बातचीत में शामिल होते जा रहे है । साहित्य और संस्कृति को परखने, अतीत को देखने और भविष्य की वैचारिकता को आधार देने की दिशा में पुस्तक का महत्व निर्विवाद रूप से प्रमाणित होता है ।
  • Mere Saakshatkaar : Nirmal Verma
    Nirmal Verma
    195 176

    Item Code: #KGP-739

    Availability: In stock


  • Mere Saakshaatkaar : Mridula Sinha
    Mridula Sinha
    300 240

    Item Code: #KGP-9346

    Availability: In stock

    रचनाकार का मन स्वयं में एक रहस्य है। मन में निहित भावनाएं, संकल्पनाएं, स्वीकृतियां, असहमतियां, प्रार्थनाएं आदि किस विध में या किस शिल्प में व्यक्त होंगी यह एक अबूझ तथ्य है। विद्वानों का ऐसा कहना है कि जब कोई रचनाकार को अपने प्रश्नों से उकसाता है तब मन को प्रकट होने का एक भिन्न प्रयोजन मिल जाता है। ‘किताबघर प्रकाशन’ की बहुचर्चित और पाठकप्रिय पुस्तक  शृंखला ‘मेरे साक्षात्कार’ के इस संकलन में सुप्रसिद्ध  रचनाकार मृदुला सिन्हा ने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न पक्षों पर बात की है। उनका कार्यक्षेत्र विस्तृत, अनुभव व्यापक और चिंतन बहुमुखी है, इसलिए उनके उत्तर जीवन व समय की गहराइयों में प्रवेश कर जाते हैं।
    एक प्रश्न के उत्तर में मृदुला सिन्हा कहती हैं, ‘साधारण से साधारण नारी बहुत कुछ दे जाती है और उसका यह देना ही मुझे आंदोलित करता है और मेरे साहित्य के लिए प्रेरणादायी प्रसंग बनता है। सामाजिक समस्याओं को सूचीबद्ध कर देना ही साहित्यकार का काम नहीं है। उसी समस्याग्रस्त समाज व्यवहार से समस्याओं का निदान ढूंढ़कर भी प्रस्तुत करना साहित्य का उद्देश्य है।’ स्पष्ट है कि वे वितर्कों या कुतर्कों की उलझनों से दूर रहकर समाज के सकारात्मक विश्लेषण में रुचि रखती हैं। उनको तुलसीदास के इस कथन पर भरोसा है—‘छूटहि मल कि मलहि के धेये, घृत कि पाव कोउ बारि बिलोये।’
    मृदुला सिन्हा के व्यक्तित्व के अनेक आयाम हैं। केवल लेखक के रूप में नहीं सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिक चिंतक, महिला हित संरक्षक आदि के रूप में भी उन्होंने अपनी प्रखर पहचान बनाई है। कहानी, उपन्यास, कविता और ललित निबंध को वे जितना साहित्य में रचती हैं, उससे अधिक जीवन में जीती हैं। इसीलिए पाठक उनकी रचनाओं और बातों में अद्भुत प्रवाह महसूस करता है।
    ‘मेरे साक्षात्कार’ के अंतर्गत मृदुला सिन्हा ने जिन तमाम मुद्दों पर अपनी बात रखी है, उनका संबंध व्यापक भारतीय समाज से है। इस अर्थ में ये साक्षात्कार ज्ञानप्रद और प्रेरक हैं।
  • Mere Saakshatkaar : ShrInaresh Mehta
    Shree Naresh Mehta
    245 221

    Item Code: #KGP-871

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Amrit Lal Nagar
    Amritlal Nagar
    490 392

    Item Code: #KGP-478

    Availability: In stock


  • Mere Saakshaatkaar : Nasera Sharma
    Nasera Sharma
    350 280

    Item Code: #KGP-664

    Availability: In stock


  • Mere Saakshaatkaar : Vidya Sagar Nautiyal
    Vidya Sagar Nautiyal
    250 225

    Item Code: #KGP-635

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Mamta Kaliya
    Mamta Kalia
    200 180

    Item Code: #KGP-558

    Availability: In stock


  • Mere Saakshaatkaar : Govind Mishra
    Govind Mishra
    400 320

    Item Code: #KGP-760

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Kamleshwar
    Kamleshwar
    400 320

    Item Code: #KGP-777

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Himanshu Joshi
    Himanshu Joshi
    350 280

    Item Code: #KGP-616

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Rajendra Yadav
    Rajendra Yadav
    300 249

    Item Code: #KGP-858

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Maheep Singh
    Mahip Singh
    160

    Item Code: #KGP-529

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Shiv Murti
    Shivmurti
    380 323

    Item Code: #KGP-745

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Chitra Mudgal
    Chitra Mudgal
    335 285

    Item Code: #KGP-557

    Availability: In stock


  • Mere Saakshatkaar : Chandrakant Deotale
    Chanderkant Deotale
    350 280

    Item Code: #KGP-713

    Availability: In stock


  • Mere Saakshaatkaar : Vishnu Nagar
    Vishnu Nagar
    400 320

    Item Code: #KGP-629

    Availability: In stock


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